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जंतर-मंतर पर उठी 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' की मांग, प्रोटेस्ट लीड कर रहे हर्ष दुबे ने गिनाईं मांगों की लिस्ट!

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ और करणी सेना का प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारी आर्थिक आधार पर आरक्षण, क्रीमी लेयर और प्रमोशन आरक्षण में बदलाव की मांग कर रहे हैं.

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Harsh Dubey
Harsh Dubey
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देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बन रहा है. 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' और करणी सेना के आह्वान पर देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग और युवा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं. प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों की भारी तैनाती की गई है.

पुलिस प्रशासन द्वारा परमिशन न दिए जाने और कार्यकर्ताओं को रोके जाने के दावों के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं.आंदोलन की अगुवाई कर रहे हर्ष दुबे का कहना है कि पुलिस उन्हें घंटों थाने में बैठाकर रामलीला मैदान जाने के लिए दबाव बनाती रही. लेकिन वे प्रधानमंत्री को ज्ञापन (मेमोरेंडम) सौंपे बिना यहां से नहीं हटेंगे.

भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग से घेरा गया जंतर-मंतर

जंतर-मंतर पर स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है. सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने जगह-जगह मनुष्य की लंबाई से भी ऊंचे-ऊंचे बैरिकेड्स लगा दिए हैं. जनपथ और आसपास के मेट्रो स्टेशनों से आने वाले लोगों को रोकने और डाइवर्ट करने के आरोप भी लग रहे हैं. मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों की गाड़ियां और आरएएफ की चौकियां बनाई गई हैं.

हर्ष दुबे का पुलिस पर आरोप

मौके पर पहुंचे आंदोलनकारी हर्ष दुबे ने पुलिस प्रशासन पर परेशान करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को अंदर नहीं आने दिया जा रहा है. हमें कल पुलिस ऑफिस में 5-5 घंटे बैठाकर रखा गया और अधिकारी मिलने तक नहीं आए. रात में कहा गया कि प्रदर्शन को रामलीला मैदान शिफ्ट कर दो. हमारी मांग है कि जब तक हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मेमोरेंडम नहीं दे देते,तब तक यहां से नहीं उठेंगे.'

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?

आर्थिक आधार पर आरक्षण: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण का आधार जाति न होकर 'आर्थिक स्थिति' होना चाहिए. जो गरीब ₹200 की दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है उसे आरक्षण की जरूरत है, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो.

क्रीमी लेयर लागू करने की मांग: जो लोग सांसद, विधायक, मंत्री, आईएएस या आईपीएस बन चुके हैं उनके बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए.

अकादमिक व प्रमोशन आरक्षण पर सवाल: युवाओं का आरोप है कि नीट (NEET), एमबीबीएस, उच्च शिक्षा के एडमिशन और नौकरियों के प्रमोशन में आरक्षण के कारण योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान हो रहा है जिससे मेधा प्रभावित हो रही है.

समान अधिकार और शांतिपूर्ण आंदोलन का दावा

अलवर और देश के अन्य हिस्सों से आए युवाओं ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 15 सभी को समानता का अधिकार देता है. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे राष्ट्रवादी और शांतिप्रिय लोग हैं जो किसी प्रकार की तोड़फोड़ या हिंसा में विश्वास नहीं रखते.

एक मंच पर एकजुट हुए कई संगठन

इस आंदोलन में हर्ष दुबे के अलावा करणी सेना के सूरजपाल अमू, राज शेखावत, सर्वेश पांडे और राणा जी समेत कई प्रमुख सामाजिक व सवर्ण संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को उनकी जायज मांगों पर विचार करना होगा. क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य और देश के विकास से जुड़ा हुआ है.

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