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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस की SIT रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर आ गई बड़ी खबर!

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में चंपत राय को क्लीन चिट मिली है. हालांकि पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में संशय बना हुआ है.

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Champat Rai and Anil Mishra
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अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के बहुचर्चित मामले में बड़ी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश के गृह विभाग द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी गई तीन सदस्यीय SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय को पूरी तरह से क्लीन चिट मिल गई है और उन्हें इस मामले में आरोपी नहीं माना गया है.

हालांकि ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में संशय बना हुआ है. उनकी संदिग्ध भूमिका की जांच अभी भी जारी है. तीन सदस्यीय एसआईटी द्वारा गृह विभाग को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी इस पूरे मामले में पुलिस की कानूनी जांच और आगे की कार्रवाई लगातार जारी है.

इन 8 लोगों को बनाया गया आरोपी

SIT की पड़ताल के बाद गृह विभाग ने जिन 8 व्यक्तियों को चढ़ावा चोरी के मामले में आरोपी माना है उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल हैं.

क्या है पूरा मामला? 

राम मंदिर में रोजाना देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में चोरी और गड़बड़ी की शिकायतें उजागर हुई थीं.मामला बढ़ा तो दान प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के लिखित अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था.यह एसआईटी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के दखल से पहले तैयार की गई थी.

लखनऊ के मंडलायुक्त (डिविजनल कमिश्नर) विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनी इस जांच टीम में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार सदस्य के तौर पर शामिल थे.

नैतिक आधार पर दिए थे इस्तीफे

जब एसआईटी ने अपनी जांच शुरू की थी तब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की नैतिकता को कायम रखते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट के अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. एसआईटी ने 23 जून को राज्य सरकार को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी जिसमें कई कड़े प्रशासनिक और कानूनी सुझाव दिए गए थे.

एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को श्री राम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई. ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर उपर्युक्त 8 नामजद कर्मचारियों व अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई अमल में लाई गई.

गृह विभाग द्वारा अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था लागू की जा रही है. वहीं आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस गया है.

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