शाहजहांपुर: विदेशी Job को ठुकराया, बंजर खेत में लगाए ड्रैगन फ्रूट, मुनाफा इतना कि है चर्चा

शाहजहांपुर: विदेशी Job को ठुकराया, बंजर खेत में लगाए ड्रैगन फ्रूट, मुनाफा इतना कि है चर्चा
तस्वीर: विनय पांडेय, यूपी तक

आज हर युवा बीटेक कर मल्टीनेशनल कंपनी में लाखों रुपए की सैलरी पैकेज का सपना देख रहा है. वहीं शाहजहांपुर के अंशुल मिश्रा ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद न केवल लाखों रुपए के पैकेज वाली जॉब को ठुकराया बल्कि विदेश में काम करने के मौके को भी रिजेक्ट कर दिया. अंशुल को कुछ यूनिक करना था. अपने ही देश में रहकर कुछ ऐसा करना था जिससे न सिर्फ उन्हें लाभ हो बल्कि इस आइडिया के दम पर दूसरे भी फायदा कमा सकें.

अहम बिंदु

फिर अंशुल ने इंटरनेट पर खोजबीन शुरू की और उन्हें ड्रैगन फ्रूट लगाने का आइडिया आया. बंजर जमीन में एक बार इन पौधों को लगाकर 35 साल तक मुनाफा कमाने वाले इस काम को शुरू किया. महाराष्ट्र से 1600 पौधे लाकर अपने बंजर खेत में रोप दिए. इसके बाद इन्हें सामान्य फसल का चार गुना मुनाफा हुआ. फिर अंशुल ने 20 हजार पौधे लगा दिए. अब इन्हें 35 लाख रुपए सालाना का इनकम हो रहा है. अब अंशुल जिले के किसानों को इस खेती की राह दिखाकर उन्हें अच्छा मुनाफा कमाने का आइडिया दे रहे हैं.

शाहजहांपुर की तहसील जलालाबाद के चिलौआ गांव के रहने वाले अंशुल मिश्रा ने चेन्नई से कंप्यूटर साइंस से बीटेक और दिल्ली से डाटा साइंस का कोर्स किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत को धरातल पर उतारने के लिए उन्होंने विदेश में नौकरी करने की बजाय 6 माह तक आत्मनिर्भर बनने के लिए शोध किया. इच्छाशक्ति और लगन के चलते उनकी मेहनत रंग लाई. इंटरनेट पर खोज करने के बाद वर्ष 2018 में महाराष्ट्र के शोलापुर गए और वहां ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद वहां से आकर 1600 पौधे बंजर खेत में लगा दिए.

इस खेती से उन्हें सामान्य फसल से 4 गुना मुनाफा हुआ. नतीजा उन्होंने खेती को विस्तार देकर 5 एकड़ में 20 हजार ड्रैगन (पिताया) के पौधे लगाए हैं. वर्तमान में अंशुल घर बैठे करीब 35 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं. इसके लिए पहले साल उन्हें सहफसली खेती का सहारा लेना पड़ा था.

इनके पौधों की कई राज्यों में है मांग

अंशुल का कहना हैं कि वे उत्तर भारत के 15 राज्यों में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले सबसे बड़े किसान हैं. ड्रैगन फ्रूट के साथ-साथ पौधों की भी बिक्री करते हैं. बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा समेत कई प्रदेशों में किसान उनके यहां से पौधे ले जाकर ड्रैगन फ्रूट की खेती का लाभ कमा रहे हैं.

अहम बिंदु

तीन तरह के होते हैं ड्रैगन फ्रूट

नागफनी प्रजाति का ड्रैगन फ्रूट ही एक मात्र ऐसा पौधा है जिसे एक बार लगाया जाता है और 35 साल तक फल आते रहते हैं. अंशुल का कहना है कि साल में 7 बार फल आते हैं. दिल्ली मंडी में ड्रैगन फ्रूट की सर्वाधिक मांग है. ड्रैगन फ्रूट की 3 प्रजातियां होती हैं. रेड ड्रैगन, येलो ड्रैगन, व्हाइट ड्रैगन. यह 3 तरह के फल होते हैं. यह फल कीवी और नाशपाती की तरह स्वादिष्ट और अत्यंत गुणकारी होता है.

सबसे अधिक लाल ड्रैगन फ्रूट की मांग

लाल ड्रैगन की सर्वाधिक मांग रहती है. अंशुल के पिता आदित्य मिश्रा का कहना है कि वह अपने बेटे की कामयाबी से बहुत खुश हैं. उनका बेटा गांव के किसानों को भी इस खेती से आय बढ़ाने की राह दिखा रहा है. महज 25 साल के युवा अंशुल मिश्रा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से इस खेती को और विस्तार करने के लिए सहयोग की अपेक्षा भी कर रहे हैं, ताकि और किसान भी इस खेती का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन सकें.

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