UP चुनाव 2022: हाथरस में इस तारीख को होगी वोटिंग, जानिए सभी विधानसभा सीटों का हाल

UP चुनाव 2022: हाथरस में इस तारीख को होगी वोटिंग, जानिए सभी विधानसभा सीटों का हाल
हाथरस जिले की रेलवे स्टेशन की तस्वीर.फोटो: राजेश सिंघल

चुनाव आयोग (Election Commission) ने 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly election) 2022 की तारीखों का ऐलान कर दिया है. जाहिर सी बात है कि हाथरस के लोगों को यह जानने की उत्सुकता होगी कि जिले में वोटिंग कब होगी? आपको जिज्ञासा को दूर करते हुए बताते हैं कि हाथरस, सादाबाद और सिकन्‍दाराऊ में तीसरे चरण के तहत 20 फरवरी को वोट डाले जाएंगे.

गौरतलब है कि यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव 7 चरणों में होंगे, जबकि चुनाव परिणाम 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे.

हाथरस जिले की प्रोफाइल पर एक नजर डालिए-

काका हाथरसी की जन्मस्थली हाथरस में पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्य तौर पर बीएसपी और बीजेपी के बीच टक्कर रही थी. 2017 के चुनावों में बीजेपी ने 2 जबकि बीएसपी ने एक सीट जीती थी. वहीं, 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस विधानसभा क्षेत्र में एक भी सीट नहीं जीती थी.

पिछले साल हाथरस में एक युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था. इस मामले में विपक्ष ने जमकर सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी पर जमकर हमला बोला था. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कांड के बाद से बीजेपी से आगामी विधानसभा चुनाव में दलित वोट छिटक सकता है. इस कांड के बाद मुख्य तौर पर बीजेपी को हाथरस और सादाबाद विधानसभा सीट पर नुकसान हो सकता है. ऐसे में देखना यह महत्वपूर्ण होगा कि बीजेपी कौनसी रणनीति के साथ विपक्ष के सवालों का जनता को जवाब देगी.

आइए हाथरस जिले की प्रोफाइल पर एक नजर डालते हैं

हाथरस जिला उत्तर प्रदेश के पश्चिम भाग में बसा है. यह जिला सन 1997 में अलीगढ़ और मथुरा से टूटकर बना था. हाथरस जिला अलीगढ़, कासगंज, एटा, मथुरा और आगरा जिलों से घिरा हुआ है. हाथरस की विश्व में पहचान यहां की हींग और गुलाल के लिए है. यहां से तैयार हींग कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन आदि देशों में मुख्य रूप से एक्सपोर्ट की जाती है.

हाथरस जिले के विधानसभा क्षेत्र

  1. हाथरस

  2. सादाबाद

  3. सिकन्‍दाराऊ

हाथरस जिले की विधानसभा सीटों का विस्तार से विवरण:

हाथरस

2017: इस चुनाव में बीजेपी के हरिशंकर माहोर ने बीएसपी के ब्रज मोहन राही को हराया था. दोनों के बीच 70,661 वोटों का अंतर था.

2012: इस चुनाव में बीएसपी के गेंदालाल चौधरी ने बीजेपी के राजेश कुमार को मात दी थी. दोनों के बीच 8,673 वोटों का अंतर था.

सादाबाद

2017: सादाबाद सीट से बीएसपी के रामवीर उपाध्याय ने आरएलडी के डॉक्टर अनिल चौधरी को हराया था. दोनों को मिले वोटों का अंतर 26,610 था।

2012: इस साल के चुनाव में एसपी के देवेंद्र अग्रवाल ने बीएसपी के सतेंद्र शर्मा को 5,187 वोटों के अंतर से हराया था.

सिकन्‍दाराऊ

2017: बीजेपी की टिकट पर लड़े चुनाव बीरेंद्र सिंह राणा ने इस चुनाव में बीएसपी के बानी सिंह बघेल को मात दी थी. दोनों के बीच 14,772 वोटों का अंतर था.

2012: इस चुनाव में बीएसपी के रामवीर उपाध्याय ने एसपी के यशपाल सिंह चौहान को हराया था. दोनों के बीच हुए कड़े मुकाबले में महज 1,063 वोटों का ही अंतर था.

क्या हैं हाथरस जिले की स्थानीय समस्या?

साफ पानी के लिए लोगों को जाना पड़ता है 3-4 किलोमीटर दूर

हाथरस के सिकन्‍दाराऊ में हसायन ब्लाक के महो, नगला मया, मुहब्बतपुरा, महासिंघपुर, केशोपुर समेत 50 गांवों में साफ पानी की समस्या है. यहां का पानी पीने योग्य नहीं है. ग्रामीणों का कहना है इस पानी से उनकी हड्डियों में दर्द होता है और पेट खराब हो जाता है. महिला-पुरुषों के साथ-साथ इन गांवों के बच्चे भी 3-4 किलोमीटर दूर साफ पानी लेने जाते हैं.

सादाबाद में आलू की पैदावार अच्छी है. लेकिन इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को नकली दवाओं के वितरण से समस्या हो जाती है. इस क्षेत्र में किसानों द्वारा कई बार इस समस्या की शिकायत करने पर भी प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

सादाबाद में खारे पानी की समस्या सबसे बड़ी

सादाबाद के करीब 70-80 गांवों में खारे पानी की समस्या है. इन गांवों में पानी पीने योग्य नहीं है. स्थानीय लोग साफ पानी की तलाश में दूर-दूर तक जाते हैं. पिछले कई चुनावों से पहले नेताओं ने इस समस्या के निस्तारण की बात कही है, लेकिन सच बात यह है कि अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है.

हाथरस में लटका पड़ा है अमृत योजना का काम

हाथरस में अमृत योजना के तहत शहर में गड्ढे खोद दिए गए हैं. कई जगह पाइप भी डाल दिए गए हैं. लेकिन घरों तक पानी पहुंचाने का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है. शहर में जगह-जगह गड्ढे खुदने के चलते लोगों को इससे काफी परेशानी होती है. इसके अलावा, हाथरस शहर में गंदगी का भी अम्बार लगा रहता है. स्वच्छ भारत मिशन के आने के बावजूद हाथरस में गंदगी को लेकर कोई ठोस काम नहीं हो सका है.

यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. ऐसे में विपक्ष सरकार को इन मुद्दों के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी घेरने की कोशिश करेगा. अब देखना यह अहम रहेगा कि आने वाले समय में हाथरस की जनता किस पार्टी को अपना आशीर्वाद देती है.

हाथरस जिले की रेलवे स्टेशन की तस्वीर.
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