देवरिया जिले की रामपुर कारखाना विधानसभा सीट 2027 के चुनावों के लिए चर्चा का केंद्र बनी हुई है. इस सीट पर भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. यह सीट 2012 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2012 में यहां से सपा की गजाला लारी पहली बार विधायक चुनी गई थीं. 2017 में भाजपा के कमलेश शुक्ल ने जीत दर्ज की. 2022 में भाजपा के सुरेंद्र चौरसिया वर्तमान विधायक बने.
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भाजपा के वर्तमान विधायक सुरेंद्र चौरसिया का कहना है कि वे सरकार की विकास योजनाओं, युवाओं के लिए किए गए कार्यों और विकास मॉडल के दम पर 2027 में वापसी करेंगे. सपा नेताओं का आरोप है कि सीट का नाम 'कारखाना' है लेकिन यहां एक सुई बनाने तक का कारखाना नहीं है. उनका दावा है कि भाजपा के 9 साल के काम जमीन पर कहीं नहीं दिख रहे हैं.
जातीय और राजनीतिक समीकरण (अनुमानित)
रामपुर कारखाना सीट पर जातिगत समीकरण काफी महत्वपूर्ण हैं.
- दलित: ~62,000
- ब्राह्मण: ~50,500
- मुस्लिम: ~40,000
- यादव: ~35,000
- कोयरी/राजभर: ~30,000
- चौहान: ~20,000
- चौरसिया: ~3,000
गजाला लारी को यादव, मुस्लिम और कुछ दलितों का समर्थन मिलता है, जबकि भाजपा अन्य जातियों के वोटों के ध्रुवीकरण पर निर्भर करती है. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, वर्तमान विधायक सुरेंद्र चौरसिया का काम अच्छा रहा है और उन पर कोई बड़ा आरोप नहीं है, जिससे भाजपा फिलहाल 'कंफर्ट ज़ोन' में नजर आती है. हालांकि, गजाला लारी का जनसंपर्क भी काफी मजबूत है, जिससे मुकाबला बेहद कांटे का होने की संभावना है.
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