ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और अयातुल्ला अली खामनेई की मौत पर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. जहाँ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इस मुद्दे पर मुखर हैं, वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है. यूपी Tak ने अपने खास शो यूपी की राय में वरिष्ठ पत्रकारों से इस मामले में बात की है.
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मायावती की चुप्पी के पीछे की वजह
पत्रकारों का मानना है कि मायावती अक्सर भाजपा की कूटनीति और रणनीति को समझने के बाद ही अपना स्टैंड लेती हैं. चूंकि केंद्र की मोदी सरकार इस मुद्दे पर संभलकर बोल रही है, इसलिए मायावती भी खामोश हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक राजनीतिक गलियारों में यह धारणा है कि बसपा, भाजपा के 'अघोषित अलायंस' की तरह काम करती है और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सीधे स्टैंड लेने से बचती है.
सपा और कांग्रेस का आक्रामक रुख
उत्तर प्रदेश में एक बड़ी मुस्लिम आबादी है जो खामनेई की मौत से भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई है. अखिलेश यादव को डर है कि कहीं उनका यह मजबूत वोट बैंक (करीब 20%) बिखर न जाए, इसलिए वे इस मुद्दे पर तुरंत सक्रिय हो गए हैं. विपक्षी दल इसे केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी के तौर पर पेश कर रहे हैं.
भारत सरकार और डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव
पत्रकारों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले और बयान भारत के लिए नकारात्मक साबित हो रहे हैं. ट्रंप का "ऑपरेशन सिंदूर" और भारतीय नागरिकों के साथ व्यवहार चिंताजनक है. विपक्षी सवाल उठा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप के खिलाफ खुलकर क्यों नहीं बोल रहे हैं? क्या यह कोई कूटनीतिक मजबूरी है या ट्रंप का दबाव?
2027 के चुनाव पर असर
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए हर मुद्दा राजनीतिक रूप ले रहा है. विदेश नीति और मानवीय संकट आने वाले समय में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकते हैं.
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