UP Election 2027: उत्तर में प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में तमाम छोटी-बड़ी पार्टियां अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि के अनुसार गठबंधन बना रही हैं. फिलहाल यूपी में दो बड़े गठबंधन है एक बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और दूसरा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस वाला इंडिया गठबंधन. हालांकि, इन दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच यूपी में एक और तीसरे गठबंधन की सुगबुगाहट तेज हो रही है.
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ये मोर्चा वह पार्टियां बना रही हैं, जो न एनडीए में है और न ही सपा-कांग्रेस वाले इंडिया गठबंधन में है. इनमें चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और स्वामी प्रसाद मौर्य प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं. चर्चा है कि ये पार्टियां मिलकर यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एक साथ आकर तीसरा गठबंधन बना सकती हैं.
पहले भी हुए हैं ऐसे प्रयोग
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के गठबंधन की चर्चा हो रही है. इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में भी 'पीडीएम' नाम का एक गठबंधन बना था. हालांकि यह प्रयोग सफल नहीं हुआ था. साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी ओम प्रकाश राजभर, शिवपाल यादव, चंद्रशेखर और ओवैसी भी एक साथ आए थे, लेकिन चुनाव आते-आते सब अलग हो गए थे.
इस बार यूपी विधानसभा चुनाव से पहले नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर कई पार्टियों को साथ ला सकते हैं, जिससे उनके नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन बनने की भी संभावना जताई जा रही है.
आजाद समाज पार्टी के प्रवक्ता युसूफ अंसारी ने क्या बताया?
सवाल: क्या चंद्रशेखर आजाद और असदुद्दीन ओवैसी के बीच गठबंधन की कोई संभावना है?
जवाब: राजनीति संभावनाओं का ही खेल है और यहां हर तरह की संभावनाएं मौजूद हैं. आपने जिन पार्टियों (AIMIM) का नाम लिया, वह भी हमारे पास एक विकल्प है और इस पर अलग-अलग स्तर पर बातचीत चल रही है.
आपको याद होगा कि जब जंतर-मंतर पर चंद्रशेखर आजाद छात्रों के हक के लिए धरने पर बैठे थे, तब ओवैसी साहब भी उनसे मिलने गए थे. दोनों नेता लोकसभा में सांसद हैं और दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रहती है. अगर कोई गठबंधन मूर्त रूप लेता है, तो उसे जरूर सबके सामने लाया जाएगा.
बिहार में हमारे नेता चंद्रशेखर आजाद ने स्थानीय इकाई को गठबंधन का फैसला लेने के लिए अधिकृत किया था, और वहां ऐसा हुआ भी. यूपी के लिए भी स्थानीय इकाई को निर्देश दिए गए हैं. पार्टी की कोर कमेटी और वरिष्ठ नेता मिलकर सभी विकल्पों और बहुजन समाज के हितों को ध्यान में रखकर फैसला करेंगे. यह किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं होगा.
क्या यूपी में सफल होगा तीसरा मोर्चा?
अगर ओवैसी, चंद्रशेखर और स्वामी प्रसाद मौर्य का यह गठबंधन बनता है, तो यह दलित, मुस्लिम और कुशवाहा (गैर-यादव ओबीसी) वोटों को जोड़कर कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ सकता है. पिछले चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) ने जौनपुर और मुबारकपुर जैसी कई सीटों पर इतने वोट काटे थे कि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था. ओवैसी और चंद्रशेखर फिलहाल यूपी में काफी सक्रिय हैं. अगर ये गठबंधन बनता है और ये तीनों नेता एक साथ आते हैं, तो पूर्वांचल सहित कई इलाकों में ये बीजेपी और सपा के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं.
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