Mathura News: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर प्रकरण के याचिकाकर्ता फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के स्वरूप में बदलाव की मांग उठाई है. उन्होंने पत्र में कहा है कि मंदिर ट्रस्ट में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सहित उन सभी प्रमुख संतों को शामिल किया जाए, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और कारसेवा में सक्रिय भूमिका निभाई थी. साथ ही उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य सहित अन्य संतों को भी ट्रस्ट में स्थान देने की मांग की है.
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फलाहारी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम के शासनकाल में मंदिरों का संचालन साधु-संतों के नेतृत्व में होता था और यही परंपरा आज भी अपनाई जानी चाहिए. उनका कहना है कि मंदिरों का नेतृत्व यदि संत समाज के हाथों में होगा तो श्रद्धालुओं के दान का उपयोग अधिक पारदर्शी और जनकल्याणकारी कार्यों में होगा तथा चंदे में गड़बड़ी अथवा चोरी जैसी घटनाओं पर स्वतः अंकुश लग जाएगा.
उन्होंने सुझाव दिया कि श्रीराम मंदिर में आने वाले विशाल चंदे का उपयोग देश की सबसे बड़ी गौशाला और एक विशाल गुरुकुल की स्थापना में किया जाए, जिससे गौसेवा, वैदिक शिक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण को नई दिशा मिल सके. उनका कहना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज निर्माण और संस्कारों का भी केंद्र होना चाहिए.
फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में सरकारी तंत्र द्वारा संचालित गौशालाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अधिकांश सरकारी गौशालाओं में गौमाताओं की हालत संतोषजनक नहीं है. उनके अनुसार प्रशासनिक व्यवस्था में कई बार सेवा भावना के बजाय औपचारिकता हावी रहती है, जबकि साधु-संत निस्वार्थ भाव से गौसेवा और धर्मकार्य करते हैं.
उन्होंने कहा कि आम जनमानस का स्वभाव आर्थिक लाभ की ओर अधिक रहता है, जबकि संत समाज का मूल उद्देश्य सेवा, त्याग और धर्म की रक्षा है. इसलिए मंदिरों के संचालन और उनके संसाधनों के उपयोग में संतों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए. फलाहारी महाराज ने मुख्यमंत्री से मांग की कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन पर गंभीरता से विचार करते हुए संत समाज को नेतृत्व में प्रमुख स्थान दिया जाए, ताकि मंदिरों की व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सेवा-प्रधान और सनातन परंपराओं के अनुरूप संचालित हो सके.
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