Lucknow Lawyers Chambers Bulldozer Action: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर हंगामा शुरू हो गया है. हाई कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की टीम 245 चिह्नित चैंबरों को हटाने पहुंची तो मौके पर मौजूद वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इन चैंबरों को अवैध बताते हुए पहले ही लाल निशान लगाए गए थे और नंबर दर्ज किए गए थे. संबंधित चैंबरों के लिए नोटिस भी जारी किए गए थे. कार्रवाई के दौरान वकीलों ने प्रशासन के सामने वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने की मांग रखी. उनका कहना है कि लंबे समय से इन चैंबरों में बैठकर काम करने वाले वकीलों के लिए पहले दूसरी व्यवस्था की जानी चाहिए. इस कार्रवाई को लेकर मौके पर तनाव की स्थिति बन गई.
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कई सालों से प्रैक्टिस कर रहे वकील
नगर निगम की कार्रवाई का विरोध कर रहे वकीलों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 साल से इन चैंबरों में बैठकर अपनी प्रैक्टिस कर रहे हैं. अब इन्हें अवैध मानकर हटाने की कार्रवाई की जा रही है. वकीलों का कहना है कि अगर हाई कोर्ट ने इन चैंबरों को अवैध माना है तो प्रशासन उन्हें हटाने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इससे पहले उनके बैठने और काम करने का इंतजाम किया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि चैंबर हटने से रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ेगा और उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रशासन को कार्रवाई से पहले वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए.
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नगर निगम की टीम पहुंची
लखनऊ नगर निगम ने इस बार कुल 245 चैंबरों को अवैध बताकर चिह्नित किया है. इन पर लाल निशान लगाने के साथ पहचान के लिए नंबर भी दर्ज किए गए थे. नगर निगम की ओर से संबंधित चैंबरों को नोटिस जारी करने के बाद उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की गई. टीम मौके पर पहुंची तो बड़ी संख्या में वकील जुट गए और उन्होंने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. वकीलों ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि चैंबरों को हटाने से पहले उनके बैठने के लिए दूसरी जगह तय की जाए. इस दौरान कार्रवाई को लेकर विरोध देखने को मिला.
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग पर अड़े वकील
वकीलों का कहना है कि वे बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रशासन को उनके कामकाज और रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना चाहिए. उनका मुख्य विरोध चैंबर हटाए जाने से पहले दूसरी जगह का इंतजाम नहीं होने को लेकर है. वकीलों की मांग है कि नगर निगम प्रशासन उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए, ताकि प्रैक्टिस और रोजमर्रा का काम प्रभावित न हो.
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