UP News: ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी इन दिनों एआई समिट (AI Summit) में एक रोबोटिक डॉग को अपना आविष्कार बताने और भारी निवेश के दावों को लेकर विवादों में है. इस विवाद के बीच यूनिवर्सिटी के मालिकों और उनके इतिहास की भी चर्चा हो रही है. आपको बता दें कि एआई समिट के दौरान यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि उन्होंने 350 करोड़ रुपये खर्च करके एक रोबोटिक डॉग बनाया है. बाद में खुलासा हुआ कि यह डॉग चीन की एक कंपनी का है जिसे लगभग 2.5 लाख रुपये में खरीदा गया था. भारी ट्रोलिंग के बाद यूनिवर्सिटी ने माफी मांगते हुए कहा कि प्रोफेसर ऑथराइज्ड नहीं थीं और उन्होंने गलत बयानबाजी की.
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समिट में उनके द्वारा दिखाए गए एक थर्माकोल और फाइबर के ड्रोन का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसकी खराब गुणवत्ता को लेकर लोगों ने जमकर मजाक उड़ाया.
गलगोटिया परिवार का इतिहास: किताब की दुकान से यूनिवर्सिटी तक
आपको बता दें कि गलगोटिया परिवार कभी दिल्ली के कनॉट प्लेस में किताब की छोटी दुकान चलाया करता था. 1930 में 'ईडी गलगोटिया एंड संस' के नाम से उनकी दुकान थी. यह परिवार मुख्य रूप से 'कुंजी' (गाइड बुक्स) और पब्लिकेशन के व्यवसाय में रहा. 2002 में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और 2011 में ग्रेटर नोएडा में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना की.
ध्रुव गलगोटिया और 2014 का जेल कांड
यूनिवर्सिटी के सीईओ ध्रुव गलगोटिया को साल 2014 में अखिलेश यादव की सरकार के दौरान जेल जाना पड़ा था. यह मामला आगरा की एक इन्वेस्टमेंट कंपनी से लिए गए 120 करोड़ रुपये के लोन को न चुकाने से संबंधित था. ध्रुव गलगोटिया को 13 अक्टूबर 2014 को गुड़गांव से गिरफ्तार किया गया था और वे करीब एक सप्ताह तक जेल में रहे थे. बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें राहत मिली.
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