दिल्ली-एनसीआर में कई लोग किराए के मकान में रहते हैं... खास तौर पर नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में तो किराएदारों की होड़ है. ऐसे में, किराए के घर में रहते हुए अगर अचानक बिजली का स्विच, सॉकेट या पंखे का रेगुलेटर खराब हो जाए तो अक्सर समझ नहीं आता कि मरम्मत का खर्च कौन देगा.
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मकान मालिक कह सकता है कि यह किराएदार की जिम्मेदारी है, जबकि किराएदार का कहना हो सकता है कि सामान पुराना होने की वजह से खराब हुआ है. ऐसे में सबसे पहले देखना जरूरी है कि खराबी किस वजह से हुई है.
हर खराबी का खर्च किराएदार को नहीं उठाना पड़ता. अगर बिजली का कोई सामान सामान्य इस्तेमाल के दौरान पुराना होने की वजह से खराब हुआ है और उसमें किराएदार की कोई गलती नहीं है तो आमतौर पर उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है.
सामान्य इस्तेमाल से खराब हुआ सामान
मान लीजिए घर का कोई स्विच लंबे समय से इस्तेमाल होने के कारण काम करना बंद कर देता है. इसी तरह सॉकेट या पंखे का रेगुलेटर भी सामान्य इस्तेमाल के चलते खराब हो जाता है. अगर इसमें किराएदार की लापरवाही नहीं है तो ऐसी सामान्य टूट-फूट का खर्च आमतौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी हो सकता है.
घर की ऐसी जरूरी मरम्मत, जो समय के साथ सामान्य इस्तेमाल के कारण जरूरी हुई है, उसके लिए हर बार किराएदार को अपनी जेब से पैसे देने की जरूरत नहीं होती.
किराएदार की गलती से नुकसान हुआ तो?
अगर सामान किराएदार की लापरवाही या गलत इस्तेमाल के कारण टूटा है, तो स्थिति अलग हो सकती है. उदाहरण के लिए, किसी सामान से स्विच को नुकसान पहुंच गया या गलत तरीके से इस्तेमाल करने के कारण सॉकेट टूट गया. ऐसी स्थिति में मरम्मत या सामान बदलने का खर्च किराएदार को उठाना पड़ सकता है. इसलिए तय करना जरूरी है कि खराबी सामान्य इस्तेमाल से हुई है या किसी की गलती से.
रेंट एग्रीमेंट में क्या लिखा है, यह भी देखें
किराए का घर लेते समय मकान मालिक और किराएदार के बीच रेंट एग्रीमेंट होता है. इसमें कई बार मरम्मत और उसके खर्च को लेकर शर्तें साफ तौर पर लिखी होती हैं. कुछ एग्रीमेंट में छोटी-मोटी मरम्मत किराएदार की जिम्मेदारी और बड़ी मरम्मत मकान मालिक की जिम्मेदारी बताई जाती है.
ऐसे में, किसी भी विवाद की स्थिति में सबसे पहले रेंट एग्रीमेंट की शर्तें देखनी चाहिए. सिर्फ मौखिक बातचीत के आधार पर तय करना सही नहीं होगा कि खर्च किसे देना है.
मकान मालिक से विवाद हो तो क्या करें?
अगर स्विच, सॉकेट या बिजली के किसी दूसरे सामान की मरम्मत को लेकर विवाद हो रहा है तो पहले खराबी की वजह समझें. इसके बाद रेंट एग्रीमेंट में दी गई शर्तों को देखें. जरूरत पड़ने पर खराब सामान की तस्वीर या वीडियो भी सुरक्षित रख सकते हैं, ताकि स्पष्ट किया जा सके कि नुकसान किस तरह हुआ.
अगर इसके बाद भी विवाद हल नहीं होता है तो स्थानीय किराया कानून और संबंधित प्राधिकरण के नियम देखना जरूरी है. किराए से जुड़े नियम राज्य और स्थानीय कानून के हिसाब से अलग हो सकते हैं.
सामान्य टूट-फूट के कारण स्विच या बिजली का सामान खराब हुआ है तो खर्च आमतौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी हो सकती है, लेकिन किराएदार की गलती या लापरवाही से नुकसान हुआ है तो मरम्मत का खर्च किराएदार को उठाना पड़ सकता है.
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