वीडियो: UP में 50 साल से अधिक उम्र के सरकारी नौकरी वाले सावधान! कहीं सरकार न कर दे रिटायर

वीडियो: UP में 50 साल से अधिक उम्र के सरकारी नौकरी वाले सावधान! कहीं सरकार न कर दे रिटायर
तस्वीर: यूपी तक.

'जबरिया रिटायर', ये शब्द पिछले साल अपने नेम प्लेट के नीचे लिख कर पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने जबरदस्त सुर्खियां बटोरी थीं. उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें समय से पहले रिटायर कर दिया था. एक बार फिर उत्तर प्रदेश में 50 साल से अधिक उम्र के दागी कर्मचारियों को विभाग से जबरन रिटायर करने की कवायद फिर शुरू हुई है. लंबे समय से विभाग के लिए कथित तौर पर बोझ बन चुके कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट देने के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट में एक लिस्ट तैयार की जा रही है. जिसे इस महीने तक कर संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा.

अहम बिंदु

क्या सच में सरकार विभाग के लिए कथित तौर पर बोझ बन चुके कर्मचारियों को बाहर करने के लिए इस नियम का कड़ाई से पालन करवा रही है या फिर विपक्षी दलों ने जो आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक एजेंडे पर काम नहीं करने की वजह से कर्मचारियों को रिटायरमेंट का डर रही है? कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ और क्या कहता है जबरिया रिटायरमेंट पर कानून, इन सब तथ्यों को जानने के लिए यूपी तक की इन्वेस्टीगेशन टीम ने एक्सपर्ट्स से बात करने की कोशिश की.

5 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव प्रमुख सचिव और सचिव को एक आदेश जारी करते हैं कि 31 मार्च 2022 को जिन कर्मचारियों ने 50 साल की उम्र पूरी कर ली है, उन कर्मचारियों की डिपार्टमेंट के हिसाब से लिस्ट तैयार की जाए. यह लिस्ट इयरली परफॉर्मेंस असेसमेंट के हिसाब से तैयार हो, लेकिन मामला उल्टा पड़ गया. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा खुद रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन पर हैं. ऐसे में सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में सवाल उठने लगे कि बड़े अफसरों को रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन मिल रहा है तो वहीं छोटे कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया जा रहा है. यह भी कहा जाने लगा कि सरकार कर्मचारियों में अपना खौफ पैदा कर एजेंडा चलाना चाहती है.

आरएलडी ने आरोप लगाए किस अभियान से सरकार कर्मचारियों में खौफ पैदा करना चाहती है. एक तरफ मुख्य सचिव को रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन देकर तैनात कर रही है तो दूसरी तरफ कर्मचारियों का शोषण हो रहा है. हालांकि इस संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी एके जैन का कुछ और ही कहना है. वो कहते हैं कि विभाग के लिए Dead Wood यानी नॉन परफार्मिंग हो चुके कर्मचारियों को बाहर करने का नियम पुराना है. पहले भी सरकारें करती आई हैं, लेकिन कड़ाई से इसका पालन नहीं हुआ. मौजूदा सरकार इसका कड़ाई से पालन कर रही है. जो कर्मचारी भ्रष्ट हैं, जो काम नहीं कर रहे हैं, उनको विभाग से बाहर करने में कोई बुराई नहीं.

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कंपलसरी रिटायरमेंट स्कीम के तहत अपने पहले कार्यकाल में भी करीब 650 कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट दिया था. सबसे ज्यादा संख्या लगभग 450 पुलिसकर्मियों की थी. इनमें 200 हेड कॉन्स्टेबल, 100 कांस्टेबल, और 150 इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर शामिल थे. इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश पुलिस के तीन आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर राकेश शंकर और राजेश कृष्ण को भी उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए जबरन रिटायर किया गया था.

मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में लगभग 16 लाख राज्य कर्मचारी हैं जिनमें से 4 लाख कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल या उससे अधिक है. अब इन 4 लाख कर्मचारियों की संख्या में से ही खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया जाएगा. नियम की बात करें तो ऐसे कर्मचारियों के लिए डिपार्टमेंट वाइज स्क्रीनिंग कमेटी बनेगी. उस स्क्रीनिंग कमिटी की रिपोर्ट के बाद विभाग के प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव नियुक्ति के साथ मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी इस अंतिम सूची को फाइनल करेगी. पुलिस कर्मियों की स्क्रीनिंग कमेटी के लिए डीजीपी और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शामिल रहेंगे. वहीं आईएएस और आईपीएस के लिए उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर रिटायरमेंट की सिफारिश करेगी और भारत सरकार अंतिम फैसला करेगी.
अहम बिंदु

इन तमाम नियमों और स्क्रीनिंग कमेटी के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे महासंघ के अध्यक्ष सतीश पांडे कहते हैं कि दागी और नॉन परफॉर्मिंग कर्मचारियों को विभाग से बाहर करने का नियम तो पुराना है लेकिन अब अफसरों के चाटुकार ही नौकरी करेंगे और काम करने वाले बुजुर्ग कर्मचारी रिटायर कर दिए जाएंगे. सतीश पांडेय ने इस फैसले से जु़ड़े कर्मचारियों की कई अहम सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को भी उठाया है. वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर अब राजनीति भी गरमाई हुई है. आरएलडी और सपा आरोप लगा रही है कि सरकार की योजना कर्मचारियों को डराने के लिए है.

हालांकि विपक्ष के हमले पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है. बीजेपी ने विपक्षी पार्टियों पर हमला करते हुए कहा कि यूपी सरकार भ्रष्टाचार और अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, लेकिन विपक्षी दल अपराधियों और भ्रष्टाचारियों की मोह को छोड़ नहीं पा रहे इसलिए उनके साथ खड़े हैं.

इस मामले से जुड़ी पूरी रिपोर्ट को ऊपर शेयर किए गए वीडियो पर क्लिक कर देखा जा सकता है.

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