एटा: झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था, एक ही चारपाई पर दो-दो मरीज

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उत्तर प्रदेश के एटा में डेंगू और वायरल बुखार का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. मरीजों की संख्या में अचानक बेतहाशा वृद्धि होने से जिला अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है. डॉक्टर मरीजों को ठीक से इलाज नहीं दे पा रहे हैं, जिससे बुखार से पीड़ित बच्चों के माता-पिता हॉस्पिटल में इधर से उधर भटक रहे हैं. बच्चों को गोद में लिए परिजनों में काफी आक्रोश है. हॉस्पिटल में बना महिला और पुरुष का डेंगू वार्ड मरीजों से फुल हो गया है.

अस्पताल में ठीक से इलाज ना हो पाने के कारण ज्यादातर ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों के शरण में जा रहे हैं. जिसके चलते झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी कट रही है. झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक पर मरीजों की भीड़ है. सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं झोलाछाप डॉक्टर के यहां इलाज के लिए पड़े हुए हैं. हालांकि, सरकारी डॉक्टर की मानें तो सबसे ज्यादा स्थिति झोलाछाप डॉक्टर के यहां इलाज कराने से खराब हो रही है, क्योंकि झोलाछाप डॉक्टर सही जानकारी न होने के चलते ओवरडोज दवाएं मरीजों को दे रहे हैं. इससे मरीजों की तबीयत और भी ज्यादा खराब हो रही है.

एटा के जिला अस्पताल की हालत बहुत खराब हो गई है. यहां बीमार बच्चों को उनके परिजन इलाज के लिए इधर से उधर भटक रहे हैं, लेकिन उनको इलाज नहीं मिल पा रहा है. परिजनों की शिकायत है कि डॉक्टर उनके बच्चों का इलाज नहीं कर रहे हैं और उन्हें अनावश्यक हॉस्पिटल में इधर से उधर भागदौड़ करा रहे हैं. जिसकी वजह से बुखार और डेंगू का इलाज कराने आए बच्चों के परिजनों में काफी आक्रोश है.

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बुखार से पीड़ित एक बच्ची की मां आशा देवी अपना दर्द बयां करती हैं, “मेरे बच्ची को पिछले 4-5 दिनों से बुखार आ रहा था. मंगलवार को 3:00 बजे मुझे बच्ची की रिपोर्ट मिली. जिला अस्पताल में इलाज के लिए पर्चा दी थी, बाद में मेरा पर्चा गायब हो गया और कह गया कि तुम्हारा कोई पर्चा नहीं है, फिर हम वहां से वापस आ गए. पिछले 4 दिन से लगातार आ रहे हैं, लेकिन अभी तक हमारी बच्ची को इलाज नहीं मिल पाया है.”

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उसी बच्ची के पिता राजू बताते हैं, “बच्ची को दिखाना है तो नीचे वाले बोलते हैं तो तीसरे वाले फ्लोर पर चले जाओ, ऊपर जाते हैं तो वह कहते हैं कि दूसरे वाले पर चले जाओ. बस यही हो रहा है कि ऊपर चले जाओ, नीचे चले जाओ, देखने वाला कोई यहां नहीं है, ना कोई डॉक्टर मिल रहा है.”

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वहीं, डेंगू मरीजों के खाने में कीड़े निकलने के मामले सामने आए हैं, जिससे डेंगू मरीज काफी परेशान हैं. कई बार शिकायत करने के बावजूद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

सबसे ज्यादा बुरी स्थिति गांव के अंदरूनी इलाकों की है, जहां डेंगू और वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की घर-घर में चारपाई पड़ी है. ज्यादातर घरों में एक ही चारपाई पर दो-दो मरीज लेटे हुए हैं.

डेंगू और बुखार से सबसे ज्यादा जनपद के इनटीएल गांव की स्थिति खराब है. गांव में घर-घर में चारपाई बिछी हुई है. कोई भी ऐसा घर नहीं है जहां परिवार के पूरे सदस्य या दो तीन सदस्य बीमार ना हो. कहीं-कहीं घर में तो एक ही चारपाई पर दो-दो मरीज लेटे हुए हैं. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने कुछ गांवों में मेडिकल चेकअप वैन भेजी हैं, जहां भारी संख्या में लोग अपना मेडिकल चेकअप करा रहे हैं. लेकिन इतनी विकराल स्थिति को देखते हुए यह ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित हो रही है.

एटा जनपद के ऑन गांव की स्थिति बहुत खराब है. इस गांव में कार्यरत आशा की बात मानें तो इस गांव में पिछले 2 हफ्ते में करीब 4 लोगों की मौत हुई है और बुखार और डेंगू की स्थिति यहां ज्यादा खराब है. कई मरीजों को मेडिकल चेकअप और इलाज कराने के लिए एंबुलेंस से हॉस्पिटल भेजते हैं, लेकिन हॉस्पिटल वाले वहां से इन मरीजों को वापस बैरंग गांव भेज देते हैं. जिसकी वजह से लोगों की स्थिति सुधरने की जगह और ज्यादा खराब हो जा रही है.

एटा के सीएमओ उमेश त्रिपाठी ने बताया, “शीतलपुर ब्लॉक के ऑन घाट गांव में बुखार के मरीज सामने आने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां पर टीम भेजी थी जिसमें डॉक्टर पैरामेडिकल सभी थे. वहां पर लगातार आज 5 – 7 दिन हो गए तब से मैं वहां पर टीम भेज रहा हूं. जिले में अभी तक 8 लोगों की डेंगू व वायरल बुखार से मौत हो गई है. इसमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी हैं.”

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