मदरसा बोर्ड के चेयरमैन बोले- 'दारुल उलूम अंतरराष्ट्रीय संस्था, उसे मान्यता की जरूरत नहीं'

दारुल उलूम, देवबंद.
दारुल उलूम, देवबंद.फोटो: ईशान तन्खा/ इंडिया टुडे

उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड को लेकर हो रहे सर्वे के बीच जा सरकार ने दारूम उलूम समेत छोटे-बड़े मदरसों पर कार्रवाई की बात की है. तो, वहीं मदरसा बोर्ड के चेयरमैन ने दारुल उलूम को सूरज के बराबर की संस्था बताते हुए उसे किसी भी तरीके की मान्यता की जरूरत से बाहर बताया है. अब इसे लेकर के सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस सर्वेक्षण पर सवाल करते हुए इसे एक तरफा कार्रवाई करार दे रही है.

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विश्वविख्यात इस्लामिक संस्था दारुल उलूम 156 सालों से देश और दुनिया में अपनी शिक्षा और अपनी एक अलग पहचान और विचारधारा के लिए जानी जाती है. ऐसी संस्था को मदरसा बोर्ड से मान्यता लेने की जरूरत नहीं है.

डॉ. जावेद ने कहा कि इतने बड़े कद की संस्था को जो खुद मान्यता देकर शिक्षा को बढ़ावा दे रही हो उसे मदरसा बोर्ड से मान्यता की कोई जरूरत नहीं है़. उन्होंने कहा कि दारुल उलूम जो खुद देश भर में 4500 से ज्यादा मदरसों को मान्यता दे चुका हो, उसकी निष्ठा और शिक्षा के ऊपर बहस करना सूरज को दीया दिखाने जैसा है.

मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष का यह बयान सरकार के दावे के विपरीत अब सियासी सवाल खड़े कर रहा है. यूपी तक से बातचीत में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि मदरसों के खिलाफ कार्रवाई उसका स्टेटस नहीं बल्कि कार्यशैली और गतिविधि देखकर की जाएगी. उन्होंने कहा कि दारुल उलूम का हो या कोई छोटा मदरसा, अगर अवैध गतिविधि में लिप्त पाया गया तो सरकार इस पर पूरा एक्शन लेगी. जो संस्थान बच्चों को तालीम देते हैं उन्हें सरकार के नियमों का पालन करना होगा, इसलिए मदरसों का सर्वे कराया गया. जो बिना पंजीकृत मदरसे गैरकानूनी कामों में लिप्त हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा.

वहीं, इस मामले पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने दारुल उलूम मदरसा के बचाव में कहा कि 'यह अपने आप में बड़ी संस्था है, जिसके काम और नियत को लेकर के गलत भाषा में बयान देना सही नहीं है. सरकार ने सर्वेक्षण से पहले साफ किया था कि यह कार्रवाई किसी मंशा से नहीं बल्कि आंकड़े जुटाने की है, तो ऐसे सवाल क्यों हो रहे हैं? दारुल उलूम देवबंद मदरसे को शक की निगाह से देखना ठीक नहीं, यहां गरीबों की तालीम का काम होता है.'

दूसरी तरफ सियासी तौर पर विपक्ष ने इस मुद्दे पर अब सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि 'जब सरकार की संस्था मदरसा बोर्ड ही दारूम उलूम के पक्ष में बात कर रहा है तो उसके पास कोई आधार होगा? सवाल यह है कि मदरसे ही क्यों? अगर जांच करनी है तो बाकी शैक्षणिक संस्थानों पर भी की जाए. पीएफआई समेत तमाम संगठन बैन किए गए क्या वह मदरसे थे, सरकार और मदरसा बोर्ड दोनों इस मामले पर एकमत नहीं है.

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