मध्य प्रदेश चुनाव के बाद भी नहीं थम रहे अखिलेश, कांग्रेस से रार के बीच इस मिशन में लगी सपा

Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से मिली सीख के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अपने पिता स्व. मुलायम सिंह यादव के पदचिन्हों…

Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से मिली सीख के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अपने पिता स्व. मुलायम सिंह यादव के पदचिन्हों पर चलते नजर आ रहे हैं. एक और वह बीजेपी को लेकर लगातार आक्रामक है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल के सामने अपने क्षेत्रीय दल समाजवादी पार्टी को कहीं से भी झुकना नहीं देना चाहते हैं. यही कारण है कि अखिलेश यादव की मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में लगातार चुनावी रैलियां, प्रचार और अब पार्टी विस्तार की कवायद के बाद पार्टी के कई नेता सपा प्रमुख को पीएम उम्मीदवार के तौर पर खुलकर बयान दे रहे हैं.

मध्य प्रदेश चुनाव के बाद भी नहीं थम रहे अखिलेश

मध्य प्रदेश चुनाव के बाद अब अखिलेश यादव हरियाणा में भी जमीन तलाश में जुट गए हैं. यूपी के बाहर सपा के विस्तार के लिए अखिलेश की नजरे अब एमपी के बाद हरियाणा पर है जिसकी वजह से पड़ोसी राज्य में पार्टी की जमीन बनाने के लिए उन्होंने साथी तलाश में शुरू कर दिए हैं. अखिलेश यादव ने हाल ही में बनी हरियाणा जन सेवक पार्टी की ओर से जींद में आयोजित रैली में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला के साथ शामिल हुए. वाघेला के साथ अखिलेश की यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में हुई मुलाकातें लगातार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही है.

कांग्रेस से रार के बीच पार्टी विस्तार में लगी सपा

जींद को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी कहा जाता है क्योंकि वहां के अधिकतर बड़े शहरों ने यहीं से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की. रविवार को महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने जींद में जन सेवा संपर्क रैली की. बलराम कुंडू पहले बीजेपी सरकार के साथ थे लेकिन 2020 में उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद उन्होंने हरियाणा जन सेवक पार्टी बनाई. रविवार को उनकी पार्टी की पहली रैली थी जिसमें उन्होंने वाघेला के साथ-साथ अखिलेश यादव को न्योता भेजा.

क्या बताते हैं आंकड़े

वहीं आंकड़ों की बात करें तो यूपी की सत्ता में समाजवादी पार्टी यूं तो तीन बार बैठ चुकी है लेकिन हरियाणा की जमीन राजनीतिक तौर पर सपा के लिए बंजर ही रही है. 1996 से अब तक हुए 6 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने वहां उम्मीदवार उतारे लेकिन केवल एक बार एक उम्मीदवार ही जमानत बचा पाया. आंकड़ों पर नजर डालें तो 1996 में सपा 26 सीटों पर चुनाव लड़ी और 69000 से ज्यादा वोट मिले थे. 25 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. साल 2000 में सपा 19 सीटों पर लड़ी और करीब 16000 वोट पाए. 2005 में कुल 21 उम्मीदवारों के खाते में केवल 42000 वोट है. 2009 में सपा के सभी 24 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई और 15000 वोट ही मिल पाए. वहीं 2014 में सपा ने 34 सीटों पर उम्मीदवार उतरे लेकिन वोट महज 9378 मिले, 2019 में सपा ने केवल चार उम्मीदवार उतारे और उनके हिस्से कुल मिलाकर 800 वोट ही आ पाए.

कांग्रेस को मैसेज देने की कोशिश

लेकिन इन सबसे परे अखिलेश हरियाणा के अन्य दलों के लोकल नेताओं के जरिए पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और कहीं ना कहीं कांग्रेस को लोकसभा चुनाव से पहले एक मैसेज देने की कोशिश भी. माना यह भी जा रहा है की अखिलेश कांग्रेस से एमपी में हुई रण के बाद इंडिया एलाइंस को यह भी बताना चाहते हैं कि अगर जरूरत आन पड़ी तो सपा लोकसभा चुनाव अकेले लड़कर भी अच्छे परिणाम हासिल कर सकती है.

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