मेरठ की किठौर सीट पर सपा के 4 बार के मुस्लिम विधायक के सामने किसे टिकट देगी बीजेपी? ये नाम खूब चर्चा में
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो रही है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात और असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं.
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Kithore Assembly Seat: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो रही है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात और असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं. इसी सियासी माहौल में मेरठ की किठौर विधानसभा सीट चर्चा में है. यहां समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर मौजूदा विधायक हैं. वह इस सीट से 4 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. अब सवाल है कि साल 2027 में सपा उन्हें फिर मैदान में उतारेगी या कोई नया चेहरा सामने आएगा? बीजेपी से किसे टिकट मिलेगा और बसपा, आजाद समाज पार्टी व AIMIM के संभावित उम्मीदवारों की मौजूदगी से मुकाबले की तस्वीर किस तरह बदल सकती है?
किठौर में शाहिद मंजूर का पुराना चुनावी रिकॉर्ड
मेरठ जिले की किठौर विधानसभा सीट पर शाहिद मंजूर का लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है. वह साल 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में लगातार जीते. हालांकि साल 2017 के चुनाव में बीजेपी के सत्यवीर त्यागी ने उन्हें हरा दिया था. इसके बाद साल 2022 में शाहिद मंजूर ने वापसी की और एक बार फिर विधायक बने. इस तरह वह अब तक पांच बार चुनाव लड़कर चार बार जीत हासिल कर चुके हैं. बता दें अखिलेश यादव की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं.
2022 में कांटे का था मुकाबला
किठौर सीट पर 2022 का विधानसभा चुनाव काफी करीबी रहा था. शाहिद मंजूर को 1,07,104 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के सत्यवीर त्यागी को 1,04,924 वोट हासिल हुए. दोनों के बीच जीत का अंतर महज 2,180 वोट था. वहीं, बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार कुशल पाल मावी को 31,213 वोट मिले थे. AIMIM के तस्लीम अहमद को भी 4,833 वोट मिले थे. ये आंकड़े बताते हैं कि पिछली बार यहां मुख्य मुकाबला सपा और बीजेपी के बीच रहा, जबकि अन्य दलों के उम्मीदवारों को भी वोट मिले थे.
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क्या फिर शाहिद मंजूर को ही मिलेगा टिकट?
जानकारी के मुताबिक किठौर सीट से समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवार के तौर पर शाहिद मंजूर का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. इसकी वजह उनका चुनावी अनुभव और सीट पर पुराना आधार बताया जा रहा है. पार्टी की ओर से मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट देने की चर्चा भी इस संदर्भ में सामने आई है. हालांकि, 2027 के चुनाव के लिए शाहिद मंजूर की उम्मीदवारी का आधिकारिक ऐलान होने की जानकारी ट्रांसक्रिप्ट में नहीं दी गई है. इसलिए फिलहाल इसे संभावित दावेदारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
मेरठ में समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच गुटबाजी की चर्चा होती रही है. अतुल प्रधान और शाहिद मंजूर जैसे नेताओं के नाम भी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में लिए जाते हैं. हालांकि, किठौर सीट पर टिकट को लेकर अभी किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं है.
बीजेपी में सत्यवीर त्यागी समेत कई दावेदार
किठौर में समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बीजेपी की ओर से आने वाले उम्मीदवार की होगी. साल 2017 में शाहिद मंजूर को हराने वाले पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी फिर से टिकट के दावेदार बताए जा रहे हैं. उनके अलावा देवेंद्र गुर्जर और कुछ अन्य नेताओं के नामों की भी चर्चा है. इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल से मतलूब गौड़ के चुनाव लड़ने की कोशिशों का भी जिक्र किया गया है. हालांकि, बीजेपी और आरएलडी की ओर से किठौर के लिए उम्मीदवारों को लेकर किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी अभी नहीं है. ऐसे में यह देखना होगा कि गठबंधन की स्थिति और स्थानीय समीकरणों के बीच किस दल से कौन मैदान में उतरता है.
आजाद समाज पार्टी ने बाबर खरदौनी का नाम आगे किया
किठौर सीट पर आजाद समाज पार्टी की संभावित भूमिका भी चर्चा में है. यूपी तक के कार्यक्रम में बताया गया कि पार्टी ने बाबर चौहान खरदौनी को उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया है. यदि वह चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो किठौर में मुकाबले के समीकरणों पर उनकी मौजूदगी का असर चर्चा का विषय रहेगा. हालांकि, अंतिम उम्मीदवार और चुनावी गठजोड़ की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही होगी.
AIMIM से फारुख चौधरी के नाम की चर्चा
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को लेकर भी किठौर में संभावित उम्मीदवार की चर्चा है. कार्यक्रम में फारुख चौधरी का नाम लिया गया. ट्रांसक्रिप्ट में यह भी कहा गया कि गठबंधन की परिस्थितियों के हिसाब से स्थिति बदल सकती है. ऐसे में AIMIM का उम्मीदवार कौन होगा और पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी या किसी गठबंधन का हिस्सा बनेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है. साल 2022 के चुनाव में AIMIM के तस्लीम अहमद किठौर से चुनाव लड़े थे और उन्हें 4,833 वोट मिले थे. लेकिन पिछले चुनाव के नतीजों के आधार पर 2027 में पार्टी के प्रदर्शन का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी. इस बार उम्मीदवार, प्रचार, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन जैसे कई पहलू अहम होंगे.
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बसपा किसे देगी टिकट?
किठौर में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को लेकर भी अटकलें हैं. कार्यक्रम में बाबू मुनकाद के बेटे सलमान के चुनाव लड़ने की संभावना का जिक्र किया गया. इसके साथ ही एक स्थानीय ग्राम प्रधान के भी तैयारी करने की चर्चा बताई गई, लेकिन उनका नाम नहीं बताया गया. फिलहाल बसपा की ओर से उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा की जानकारी नहीं है. साल 2022 में बसपा के कुशल पाल मावी को 31,213 वोट मिले थे. इस बार पार्टी किसे टिकट देती है, यह इसलिए भी अहम होगा क्योंकि किठौर में पिछले चुनाव के दौरान सपा और बीजेपी के बीच जीत का अंतर काफी कम था. हालांकि, यह मान लेना सही नहीं होगा कि बसपा या किसी अन्य पार्टी के वोट सीधे किसी एक दल के खाते में चले जाएंगे.
क्या कई मुस्लिम उम्मीदवारों से बदलेंगे चुनावी समीकरण?
किठौर में 2027 के चुनाव को लेकर एक अहम चर्चा यह है कि अगर सपा, AIMIM, बसपा और आजाद समाज पार्टी अलग-अलग उम्मीदवार उतारती हैं, तो मुकाबला बहुकोणीय हो सकता है. इससे किस पार्टी को फायदा या नुकसान होगा, यह अभी तय नहीं कहा जा सकता. वोटों का बंटवारा अपने आप किसी एक दल के पक्ष में नहीं जाता. उम्मीदवारों की लोकप्रियता, जातीय समीकरण, स्थानीय संगठन, चुनावी मुद्दे और गठबंधन भी नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं.
किठौर में पिछली बार सपा और बीजेपी के बीच केवल 2,180 वोटों का अंतर था. ऐसे में सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों का चयन महत्वपूर्ण रहेगा. फिलहाल शाहिद मंजूर की संभावित उम्मीदवारी, बीजेपी के दावेदारों में सत्यवीर त्यागी और देवेंद्र गुर्जर के नाम तथा बसपा, AIMIM और आजाद समाज पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा जारी है.
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