ताजमहल विवाद: मोदी सरकार पहले ही कह चुकी है- 'ताजमहल के हिंदू मंदिर होने का सबूत नहीं'

ताजमहल विवाद: मोदी सरकार पहले ही कह चुकी है- 'ताजमहल के हिंदू मंदिर होने का सबूत नहीं'
फोटो: मनीष अग्निहोत्री/इंडिया टुडे

विश्व के अजूबों में शुमार ताजमहल एक बार फिर काफी चर्चा में है. वजह इसकी अपनी बनावट, खूबसूरती और शाहजहां-मुमताज का प्रेम नहीं बल्कि इसके हिंदू मंदिर होने के दावे, जयपुर राजघराने का पैलेस होने का दावा और इसके 22 बंद कमरों में हिंदू मंदिर होने के प्रमाण संबंधी दावे से है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में ताजमहल के 22 बंद कमरों को खोलने के लिए लगी याचिका, इलाहाबाद हाईकोर्ट में ताज महल के भीतर भगवा और धर्मदंड लेकर प्रवेश की अनुमति संबंधी याचिका और जयपुर के पूर्व राजघराने की सदस्य और भाजपा सांसद दीया कुमारी के दावे के बीच हम आपको बता रहे हैं कि मामले पर मोदी सरकार पहले ही साफ कह चुकी है - ताजमहल के हिंदू मंदिर होने का सबूत सरकार के पास नहीं है.

अहम बिंदु

वर्ष 2015 में मोदी सरकार में संस्कृति मंत्री रहे डॉ. महेश शर्मा ने मामले पर लोकसभा में साफतौर पर कहा था कि सरकार के ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ताजमहल हिंदू मंदिर था. इसके साथ एएसआई (ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) ने वर्ष 2017 में पहली बार माना है कि ताजमहल मंदिर नहीं, बल्कि मकबरा है. कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान दाखिल हलफनामे में एएसआई ने ये कहा था.

वर्ष 1965 में पहली बार आई चर्चा

सबसे पहले वर्ष 1965 में पीएन ओक की पुस्तक 'ताजमहल अ ट्रू स्टोरी' में इसके शिव मंदिर होने का दावा किया गया था. इसके बाद वर्ष 2015 में आगरा की अदालत में ताजमहल को तेजो महालय (शिव मंदिर) घोषित करने की याचिका डाली गई थी. साल 2017 में भाजपा सांसद विनय कटियार ने मुख्यमंत्री योगी से इसे तेजो महालय घोषित करने की बात रखी थी. इसी वर्ष भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दावा किया था कि वो ताज महल के दस्तावेजों तक पहुंच चुके हैं. दस्तावेजों के मुताबिक शाहजहां ने जयपुर राजघराने से ताजमहल की उस जमीन को जबरन बेचने को मजबूर किया और उसके एवज में महज 40 गांव दिए थे.

अहम बिंदु

डॉ. रजनीश सिंह की याचिका से फिर चर्चा में आया मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अयोध्या के बहरामऊ के रहने वाले डेंटिस्ट डॉ. रजनीश ने याचिका दायर की है. रजनीश भाजपा की अयोध्या जिला समिति के सदस्य हैं और मीडिया कोऑर्डिनेटर भी हैं. याचिका में ताजमहल के ऊपरी और निचले हिस्से में स्थित वो 22 बंद कमरों को खुलवाकर एएसआई से जांच कराने की बात कही गई है. याचिका में ताज महल के अतीत में 'तेजो महालय' होने का दावा किया गया है. अदालत में दायर याचिका के मुताबिक तेजो महालय का निर्माण 1212 ईं. में राजा परमर्दिदेव ने कराया था. बाद में यह जयपुर के राजा मानसिंह के नियंत्रण में चला गया था. फिर विरासत के रूप में राजा जय सिंह को ये मिला था. याचिका में इस बात का भी जिक्र है कि शाहजहां ने तेजो महालय की जमीन वर्ष 1632 में हड़प ली थी.

इधर भगवा पहनकर जाने के लिए लगी दूसरी याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक दूसरी याचिका लगाई गई जिसमें ताजमहल के भीतर भगवा पहनकर और धर्मदंड लेकर जाने के लिए अदालत से अनुमति मांगी गई है. बीते मंगलवार 10 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह अंतरिम राहत प्रार्थना पत्र अयोध्या के तपस्वी छावनी के जगतगुरु परमहंस आचार्य और वृंदावन के महेश्वर धाम के महंत धर्मेंद्र गोस्वामी की तरफ से उनके अधिवक्ता अभिषेक तिवारी ने दाखिल की है.

इस याचिका में 26 अप्रैल का जिक्र करते हुए कहा गया है कि उक्त दिन अयोध्या के जगतगुरु परमहंस आचार्य आगरा में थे. वह ताजमहल घूमने जाना चाहते थे, लेकिन ताजमहल के प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारियों ने धर्मदंड लेकर और भगवा कपड़े पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं दी. जबकि अगले दिन 27 अप्रैल को एक अन्य व्यक्ति को धर्मदण्ड और भगवा कपडे़ पहनकर ताजमहल के भीतर जाने की इजाजत दे दी गयी. इसीलिए धार्मिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए आगरा के ताजमहल में भगवा वस्त्र में धर्मदंड लेकर करने संबंधी आदेश जारी किया जाए.

जयपुर की पूर्व राजघराने की सदस्य और सांसद दीया कुमारी ने दावा किया है कि ताजमहल से जुड़े दस्तावेज उनके पोथीखाने में मौजूद हैं. यदि अदालत की तरफ से दस्तावेज को लेकर कोई आदेश आएगा तो वे उसे मुहैया कराएंगी. दस्तावेजों के आधार पर दीया कुमारी बताया कि ताजमहल जयपुर राजघराने का पैलेस था जिसपर शाहजहां ने कब्जा कर लिया.

दीया कुमारी ने कहा कि ये अच्छी बात है कि ताज महल के उन 22 कमरों को खोलने के लिए याचिका दाखिल की गई है. इससे पूरा सच सामने आएगा. साथ ही दीया कुमारी ने ये भी कहा कि वो भी पूरे मामले को फिलहाल एग्जामिन कर रही हैं. दीया कुमारी ने कहा कि शाहजहां ने उस पैलेस के पूरे जमीन पर भी कब्जा कर लिया, क्योंकि तब उसी का शासन था. तब मुआवजा जैसा कोई नियम भी नहीं हुआ करता था जैसा अब है.

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