टोक्यो पैरालंपिक: बैडमिंटन फाइनल में हारे सुहास एलवाई, सिल्वर मेडल पर किया कब्जा

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टोक्यो पैरालंपिक खेलों के बैडमिंटन मैन्स सिंगल्स SL4 फाइनल में भारत के सुहास एलवाई को फ्रांस के लुकास माजूर से हार का सामना करना पड़ा है. ऐसे में सुहास को सिल्वर मेडल के साथ ही संतोष करना पड़ेगा.

नोएडा के 38 वर्षीय जिलाधिकारी सुहास ने पैरालंपिक में मेडल जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी के तौर पर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है.

पहले दो मैचों को 20 मिनट से भी कम वक्त में अपने नाम करने वाले सुहास ने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 31 मिनट में हराया था.

सुहास कम्प्यूटर इंजीनियर हैं और 2007 बैच के आईएसएस अधिकारी भी. वह 2020 से नोएडा के जिलाधिकारी हैं. सुहास इससे पहले प्रयागराज, आगरा, आजमगढ़, जौनपुर और सोनभद्र जिलों के जिलाधिकारी रह चुके हैं.

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कैसे शुरू हुआ सुहास के खेल का सफर?

अगस्त के आखिरी हफ्ते में टोक्यो जाने से पहले सुहास ने अपने रुटीन के बारे में बताया था, ”मैं दिन के सभी काम खत्म होने के बाद रात 10 बजे से दो घंटे तक अभ्यास करता हूं. मैं लगभग 6 सालों से इस तरह से अपने खेल और प्रशासनिक कर्तव्यों का प्रबंधन कर रहा हूं.”

सुहास ने बताया था कि उनकी पेशेवर यात्रा 2016 में शुरू हुई, जब वह आजमगढ़ जिले के डीएम थे और वहां एक बैडमिंटन चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था.

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उन्होंने बताया, ‘मैं टूर्नामेंट के उद्घाटन में अतिथि था और (उसमें) हिस्सा लेने की इच्छा व्यक्त की. तब तक यह मेरे लिए एक शौक था क्योंकि मैं बचपन से बैडमिंटन खेल रहा था. मुझे वहां खेलने का मौका मिला और मैंने राज्य स्तरीय खिलाड़ियों को हरा दिया.”

सुहास ने 2017 और 2019 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में पुरुष एकल और युगल स्वर्ण जीता था. उन्होंने ब्राजील में 2020 में भी स्वर्ण पदक जीता था.

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