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UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, CJI सूर्यकांत ने सुनवाई में ये 5 बड़ी बातें कहीं

संजय शर्मा

UGC New Rules: सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक. CJI सूर्यकांत बोले- नियम अस्पष्ट हैं और दुरुपयोग की संभावना है. 2012 के नियम रहेंगे लागू.

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Photo: Arun Kumar/ India Today
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यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध के बीच आज यानी 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम सुनवाई हुई.  सुप्रीम कोर्ट ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है.कोर्ट ने कहा कि 2012 के दिशानिर्देश लागू और आगे भी प्रभावी रहेंगे. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन नियमों की भाषा और मंशा पर सवाल उठाए हैं. CJI ने कहा कि 'ये नियम अस्पष्ट हैं और इनका दुरुपयोग संभव है.' अब इस मामले की अगली सुनवाई मार्च के महीने में होगी. 

ये हैं CJI सूर्यकांत की प्रमुख टिप्पणियां

  • "मुझे खेद है कि प्रथम दृष्टया ये नियम अस्पष्ट हैं और इनका दुरुपयोग होने की संभावना है. प्रयुक्त भाषा भी अस्पष्ट है."
  • "75 वर्षों में जातिविहीन समाज की ओर बढ़ने से हमने जो कुछ भी हासिल किया है, क्या यह पीछे की ओर जाना है?"
  • "हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए. साथ ही प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी तंत्र भी होना चाहिए."
  • "भारत की एकता हमारे शैक्षणिक संस्थानों में झलकनी चाहिए."
  • "विश्वविद्यालय, स्कूल और कॉलेज अलग-थलग नहीं रह सकते. पूरे समाज का क्या हाल होगा... अगर कैंपस में ऐसा होता है तो कैंपस के बाहर लोग कैसा व्यवहार करेंगे?"

दिया गया विशेषज्ञों की समिति बनाने का सुझाव

मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इन विनियमों की समीक्षा की आवश्यकता है.  उन्होंने कहा, "हम आज कह रहे हैं कि 2012 के नियम अगले आदेश तक लागू रहेंगे. भाषा को स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता है."

कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिकाओं में उठाए गए सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने को कहा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इन नियमों की समीक्षा के लिए शिक्षाविदों, न्यायविदों और सामाजिक अभिकर्ताओं की एक समिति गठित की जानी चाहिए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार का विभाजन न हो. कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल यूजीसी के नए नियम ठंडे बस्ते में चले गए हैं.  अब जब तक विशेषज्ञों की समिति इसकी समीक्षा नहीं करती और केंद्र अपना जवाब दाखिल नहीं करता तब तक पुराने नियम ही प्रभावी बने रहेंगे.

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अनिशा माथुर और सृष्टि ओझा के इनपुट्स के साथ