संजय सिंह का योगी सरकार पर हमला, पेयजल और स्वच्छता मिशन में करोड़ों के गबन का लगाया आरोप

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आम आदमी पार्टी (आप) ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर फिर एक बार भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. आम आदमी पार्टी प्रदेश सरकार की ओर से चलाए जा रहे राज्य पेयजल और स्वच्छता मिशन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर हमलावर हुई है. ‘आप’ के यूपी प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में जिस संस्था (SWSM) के द्वारा राज्य पेयजल स्वच्छता मिशन को चलाया जा रहा है वह संस्था रजिस्टर्ड ही नहीं है.

भारत सरकार के द्वारा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ग्राम विकास विभाग की ओर से राज्य पेयजल और स्वच्छता मिशन की शुरुआत की गई है. इस संबंध में भारत सरकार की तरफ से जारी दिशानिर्देशों में साफ लिखा गया है कि राज्यों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए SWSM (State Water and Sanitation Mission) नामक एक संस्था बनाकर काम किया जाए.

संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण इलाकों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना में फर्जीवाड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि SWSM के जरिए करोड़ों रुपए का काम किया जा रहा है और यह संस्था रजिस्टर्ड ही नहीं है. 2012 के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार, राज्य पेयजल और स्वच्छता मिशन, ग्राम विकास विभाग के अधीन एक पंजीकृत संस्था होगी. आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक, SWSM उत्तर प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट में रजिस्टर्ड ही नहीं है.

सिंह ने कहा भारत सरकार की गाइडलाइन्स का हुआ उल्लंघन

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संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार की गाइडलाइन्स का उल्लंघन करते हुए हजारों करोड़ रुपए के टेंडर इस योजना के तहत यूपी में बांटे गए हैं. संजय सिंह का आरोप है कि इस मिशन में एनआरएचएम से बड़ा घोटाला हुआ है.

संजय सिंह के अनुसार, लखनऊ के रजिस्ट्रार चिट फंड एंड सोसाइटीज ने बताया है कि SWSM नहीं, लेकिन उसके मिलते-जुलते (Uttar Pradesh Water Supply and Sanitation) नाम से संस्था रजिस्टर्ड है.

संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कमीशन खाकर इस मिशन में मनमाने ढंग से कंपनियों को करोड़ों रुपए के टेंडर दिए गए हैं. उन्होंने कहा है कि महाघोटाले की जांच की जानी चाहिए.

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वहीं, दूसरी तरफ ‘आप’ द्वारा लगाए गए वेंटीलेटर खरीद में घोटाले के आरोप में लोकायुक्त ने प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) आलोक कुमार को नोटिस भेजा है. लोकायुक्त ने 23 सितंबर तक प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) से जवाब मांगा है.

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