लखीमपुर खीरी हिंसा: मृतक पत्रकार के पिता ने रो-रोकर सुनाई पूरी कहानी, उठाए कई सवाल

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार, 3 अक्टूबर को हुई हिंसा ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा. यूपी पुलिस के मुताबिक, इस घटना में 8 लोगों की जान गई. इन 8 लोगों में किसानों और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ रमन कश्यप नामक पत्रकार भी शामिल हैं. पत्रकार रमन कश्यप के पिता राम दुलारे कश्यप ने यूपी तक से बातचीत में कहा कि अगर उनके बेटे को सही समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी. इस खबर में आगे पढ़िए राम दुलारे कश्यप ने और क्या-क्या कहा.

‘मेरा बेटा कवरेज करने के लिए गया था. वहां वो गाड़ी की चपेट में आ गया. किसकी गाड़ी है, कौनसी गाड़ी है ये मुझे मालूम नहीं. ये शासन-प्रशासन पता लगाए कि किसकी गाड़ियां हैं और उन्हें कौन चला रहा था.’

‘ये करीब पौने चार बजे की घटना है. हादसे के बाद करीब साढ़े छह बजे तिकुनिया कोतवाल ने शव को गाड़ी में लदवा दिया था. इलाज के लिए तिकुनिया और निघासन में इंतजाम था लेकिन, वहां नहीं ले गए. सीधे मोर्चरी में डाल दिया.’

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राम दुलारे कश्यप ने बताया कि सूचना मिलने पर सुबह 4 बजे करीब वह मोर्चरी पहुंचे और शिनाख्त करने के बाद उन्होंने अपने बेटे की पहचान की. उन्होंने रोते हुए बताया कि अगर उनके बेटे को टाइम से किसी अस्पताल में पहुंचा दिया जाता, तो शायद जान बच सकती थी.

राम दुलारे कश्यप ने कहा कि अगर 3 अक्टूबर को घटनास्थल पर पुलिस बल अच्छे तरीके से तैनात होता तो ये घटना नहीं होती.

आपको बता दें कि रमन कश्यप की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लाठी-डंडों से पिटाई होने की बात कही गई है. जबकि उनके पिता ने कुछ और बताया है.

उन्होंने बताया कि रमन कश्यप के सिर में ज्यादा चोट लगी थी, उनकी बॉडी पर लाठी-डंडे से पिटाई के निशान नहीं थे. बकौल राम दुलारे, उनके बेटे की पेंट-शर्ट कट गई थी और हाथ-पैर छिल गए थे. शरीर पर रगड़न के निशान थे. हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं मिली है.

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घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार विनीत कुमार गुप्ता ने क्या बताया?

तिकुनिया की तरफ से बीजेपी का काफिला आ रहा था. स्पीड रही होगी 120 के आसपास. वो जो कवरेज कर रहा था हमारा मित्र, हमारा भाई उसको काफिला रौंदते हुए निकला. इसको हम हादसा नहीं, हत्या कहेंगे हत्या. बीजेपी के द्वारा हमारे पत्रकार की हत्या की गई है.

विनीत कुमार गुप्ता

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उन्होंने आगे बताया कि गाड़ी से टक्कर लगने के बाद रमन गिरे और उनके सिर में चोट लगी. इसके बाद गाड़ियां उनको रौंदते हुए निकल गईं. उन्होंने दावा किया कि थार गाड़ी ने ही रमन को टक्कर मारी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ता को बचाने में लगा था न कि किसान, पत्रकार या किसी अन्य व्यक्ति को.

क्या है पूरा मामला?

यूपी के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में रविवार को भारी हिंसा हुई. यूपी पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में कुल 8 लोगों की मौत हुई है. हिंसा की यह घटना तिकुनिया से 4 किलोमीटर दूर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पैतृक गांव बनवीरपुर में आयोजित कुश्ती कार्यक्रम में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पहुंचने से पहले हुई.

संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक, प्रदर्शनकारी किसान केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे. मोर्चा ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के गाड़ियों के काफिले ने किसानों को रौंदा और फायरिंग भी की गई. बताया जा रहा है कि यह काफिला डिप्टी सीएम को रिसीव करने के लिए आ रहा था.

इस मामले में आशीष मिश्रा ने दावा किया है कि घटना के वक्त वह काफिले की गाड़ियों में मौजूद नहीं थे. इसके साथ ही आशीष ने दावा किया है, ”हमारे कार्यकर्ता डिप्टी सीएम को रिसीव करने जा रहे थे, जैसे ही वो लोग तिकुनिया से निकले, तो अपने आप को किसान कहने वालों ने आक्रमण कर दिया.”

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