UP नगर निकाय चुनाव को लेकर गतिविधियां हुईं तेज, राज्य निर्वाचन आयोग ने दिया ये निर्देश

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सांकेतिक तस्वीरफोटो: यूपी तक

UP News: उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच शनिवार, 3 सितंबर को राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को इसकी तैयारी के मद्देनजर एक अहम निर्देश जारी किया. आपको बता दें कि आयोग ने नामांकन पत्र के निर्धारित प्रारूप छपवाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं. इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एसके सिंह ने बताया था कि आगामी दिसंबर माह तक नगर निकाय चुनाव हो सकते हैं

चुनाव को लेकर क्या है सियासी दलों की तैयारी?

आपको बता दें कि नगर निकाय चुनाव के लिए सूबे में सियासी दलों ने अपनी-अपनी तरफ से तैयारियां करनी शुरू कर दी हैं. गौरतलब है कि पिछले दिनों हुई बहुजन समाज पार्टी की बैठक में फैसला लिया गया था की चुनाव में पार्टी सभी वॉर्डों से अपने प्रत्याशी उतारेगी. वहीं, दूसरी तरफ ऐसी खबर है कि भाजपा ने ऐलान किया है कि वह नगर नगर निकाय चुनाव में नेताओं के परिजनों को टिकट नहीं देगी.

ऐसी चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव जिलेवार दौरा कर रहे हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि इन दौरों के पीछे अखिलेश नगर निकाय चुनाव में विरोधी पार्टियों को मात देने के लिए रणनीति भी बना रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ यह खबर है कि समाजवादी पार्टी की सहयोगी पार्टी रालोद इस चुनाव में सपा से अलग होकर लड़ सकती है.

अहम बिंदु

गौरतलब है कि इससे पहले शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने भी नगर निकाय चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. अगर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी स्थानीय निकाय में अपने प्रत्याशी उतार देती है तो कुछ क्षेत्रों ख़ासकर यादव लैंड में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की मुश्किल बढ़ सकती है. साथ ही समाजवादी पार्टी से असंतुष्ट चल रहे कार्यकर्ता भी टिकट न मिलने पर प्रसपा की ओर रुख कर सकते हैं. ऐसे में अखिलेश यादव ये नहीं चाहेंगे कि सपा से अलग शिवपाल यादव के कार्यकर्ता स्थानीय निकाय चुनाव लड़ें.

राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एसके सिंह के अनुसार, अधिसूचना 15 नवंबर के बाद जारी की जा सकती है. उन्होंने बताया था कि इलेक्शन कमिशन सरकार को अधिसूचना के लिए प्रस्ताव भेजती है और सरकार अधिसूचना जारी करती है. अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है, क्योंकि अभी सरकार नए नगर पंचायतों के गठन के साथ ही नगर निकायों की सीमा के विस्तार के कार्यों को करने में लगी हुई है. जब सरकार अपना यह कार्य पूरा कर लेगी तो उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग उस आधार पर वोटर लिस्ट तैयार करेगी, जिसमें लगभग डेढ़ महीने का समय लगेगा.

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