पीलीभीत में ऐसा क्या हुआ था जो अब 2 SDM हो पर FIR हो गई दर्ज, कंप्यूटर ऑपरेटर भी फंसा

यूपी तक

• 07:00 PM • 22 Oct 2026

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की जांच यानी SIR के बीच पीलीभीत से बड़ी कार्रवाई हुई है. डीएम आलोक कुमार के मुताबिक, मतदाता सूची में अनियमितताओं के मामले में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

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उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की जांच यानी SIR की प्रक्रिया के बीच पीलीभीत से बड़ी कार्रवाई की खबर आई है. यहां मतदाता सूची में गड़बड़ी की जांच के बाद दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पीलीभीत के डीएम आलोक कुमार ने इसकी जानकारी दी है. 

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मामला सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने सिर्फ पीलीभीत ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की जांच के निर्देश दिए हैं.

विवाद की शुरुआत कांग्रेस के उस आरोप से हुई, जिसमें पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले जाने का दावा किया गया था. पार्टी का कहना था कि नाम बदलने के बावजूद मतदाताओं के EPIC नंबर और क्रम संख्या पहले जैसे ही रहे. चुनाव अधिकारियों की जांच में भी मतदाता विवरण से जुड़ी अनियमितताओं की पुष्टि हुई है.

पीलीभीत में वोटर लिस्ट में क्या गड़बड़ी मिली?

कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीलीभीत सदर की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था. पार्टी के नेताओं ने दावा किया कि 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 ऐसे लोगों के नाम काटे गए जो अब भी क्षेत्र में रह रहे थे और 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जिनके वहां रहने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए.

कांग्रेस ने इन तीनों तरह के मामलों को जोड़कर कुल 16,554 मतों से जुड़ी कथित गड़बड़ी का दावा किया. ये आंकड़े पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप हैं. इन्हें सभी मामलों में अंतिम रूप से साबित हुई गड़बड़ी नहीं माना जाना चाहिए.

जांच में क्या सामने आया?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा को शिकायत मिली थी कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से EPIC नंबर ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने पर किसी दूसरे मतदाता का विवरण दिखाई दे रहा है. इस शिकायत की जांच कराई गई, जिसमें अनियमितताओं की पुष्टि हुई.

इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मतदाता सूची में मिली गलतियों को तुरंत ठीक करने का निर्देश दिया. साथ ही, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) के ऑपरेटर को मतदाता सूची से जुड़े कामों से तत्काल हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए.

राज्य निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे. अब पीलीभीत के डीएम आलोक कुमार ने दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी है.

यूपी के सभी जिलों में होगी जांच

पीलीभीत में गड़बड़ी सामने आने के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों की हर विधानसभा सीट की मतदाता सूची की जांच करने के निर्देश दिए हैं. उनसे दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है.

पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी को भी जिले की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की गहन जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है. इसके अलावा, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए भी अलग से रिपोर्ट मांगी गई है.

इसका मतलब है कि जांच अब पीलीभीत सदर तक सीमित नहीं रहेगी. चुनाव अधिकारी पता लगाने की कोशिश करेंगे कि प्रदेश के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाताओं के नाम, पहचान संख्या या दूसरे विवरणों में इसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई है.

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए थे?

कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतिम ड्राफ्ट के प्रकाशन के बाद जुलाई से सितंबर के बीच मतदाता सूची में बदलाव किए गए. उनका दावा था कि इन बदलावों में मतदाताओं के EPIC और क्रम संख्या को बदले बिना नामों में फेरबदल किया गया.

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक EPIC नंबर पहले मोहम्मद यूसुफ के नाम पर दर्ज था, लेकिन बाद में उसी नंबर पर हसरत, पुत्र रमजान अली, का विवरण दिखाई देने लगा. कांग्रेस ने इस तरह के 13,150 मामले मिलने का दावा किया था.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने भी मतदाता सूची से नाम गायब होने और गलत विवरण दर्ज होने पर सवाल उठाए थे. पार्टी ने इस मामले में कानूनी सलाह लेने और अदालत जाने की बात कही थी.

वोटर अभी क्या करें?

इस मामले के बाद मतदाताओं के लिए अपनी जानकारी जांचना जरूरी है. केवल वोटर आईडी कार्ड होना पर्याप्त नहीं है, मतदाता सूची में नाम और विवरण सही होना भी जरूरी है.

मतदाता भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना EPIC नंबर दर्ज करके सूची में नाम और अन्य जानकारी देख सकते हैं. यदि नाम, पिता का नाम या दूसरे विवरणों में गड़बड़ी दिखती है तो संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करके उसे ठीक कराने की प्रक्रिया पूछ सकते हैं.