Mathura News: यमुना किनारे कचरे का अंबार, चार प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

Newzo

• 03:07 PM • 04 Jul 2026

Mathura pollution News: धर्मनगरी मथुरा में आस्था की पहचान यमुना आज कचरे और प्रदूषण की मार झेल रही है. घाटों पर बढ़ते अपशिष्ट ने सफाई व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोग और विशेषज्ञ अब समन्वित कार्रवाई के साथ स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

यमुना किनारे कचरे का अंबार, चार प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

यमुना किनारे कचरे का अंबार, चार प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

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Mathura pollution News:  धर्मनगरी मथुरा में यमुना के घाटों और नदी किनारों पर जमा कचरा एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है. श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर प्लास्टिक, पूजन सामग्री, घरेलू अपशिष्ट और नालों से आया ठोस कचरा किनारों पर जमा हो रहा है, इससे ना केवल यमुना का सौंदर्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि प्रदूषण की समस्या भी गंभीर बनी हुई है. इसे जल्द से जल्द साफ़ सुथरा कर प्रदूषण मुक्त बनाना चाहिए.

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पर्यावरण से जुड़े जानकार डॉक्टर केपी सिंह का कहना है कि यमुना किनारों पर कचरा जमा होना केवल सफाई का नहीं, बल्कि समन्वय का भी मुद्दा है. जब तक नगर निगम, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन नहीं करेंगे, तब तक यमुना को स्वच्छ रखने का लक्ष्य अधूरा रहेगा.

यमुना के सफ़ाई का दायित्व इन विभागों पर

मथुरा-वृंदावन नगर निगम की जिम्मेदारी है कि शहर से निकलने वाले ठोस कचरे का नियमित संग्रहण, वैज्ञानिक निस्तारण और घाटों की सफाई सुनिश्चित करें, ताकि नालों के माध्यम से प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरा यमुना तक ना पहुंचे. घाटों पर नियमित सफाई और कचरा संग्रहण की व्यवस्था भी नगर निगम के दायित्व में शामिल है.

 उत्तर प्रदेश जल निगम का दायित्व है कि शहर के सीवर नेटवर्क, सीवेज पंपिंग स्टेशनों और सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) का संचालन एवं उसका रखरखाव करें ताकि शहर का गंदा पानी यमुना तक ना पहुँचे. लेकिन फ़िलहाल ऐसा हो नहीं रहा विभाग अपनी ज़िम्मेदारी उठाने में असमर्थ है.

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी यमुना के जल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करना, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना तथा पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन होने पर संबंधित इकाइयों और संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई करना है. बोर्ड समय-समय पर जल गुणवत्ता की रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी जारी करता है.

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) का कार्य नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत यमुना सहित गंगा बेसिन की नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए परियोजनाओं का वित्तपोषण, निगरानी और समन्वय करना है. मिशन का उद्देश्य केवल सफाई अभियान चलाना नहीं, बल्कि सीवर प्रबंधन, घाटों के विकास और प्रदूषण नियंत्रण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कराना भी है.