76 सीढ़ियों के पवित्र रास्ते को पूरा कर... अयोध्या में राम मंदिर दर्शन से पहले हनुमान गढ़ी क्यों जाते हैं भक्त?
यूपी तक
• 01:44 PM • 19 May 2026
Hanuman Garhi Ayodhya Darshan: राम मंदिर दर्शन से पहले हनुमान गढ़ी पहुंचते हैं श्रद्धालु, जहां 76 सीढ़ियों का पवित्र मार्ग भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. बाल हनुमान की प्रतिमा, भव्य संध्या आरती और किलेनुमा स्थापत्य भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत अनुभव से भर देता है.
ADVERTISEMENT


1/10
|
अयोध्या धाम में श्री हनुमान गढ़ी सिर्फ आस्था का केंद्र ही नही, बल्कि अद्भुत वास्तुकला का एक संगम है. हनुमान गढ़ी का विशाल प्रवेश द्वार अयोध्या की प्राचीन धार्मिक वास्तुकला का प्रतीक माना जाता है. ऊंचे टीले पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. मंदिर का किला-नुमा स्वरूप इसे 'गढ़ी' नाम देता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)


2/10
|
76 सीढ़ियों के पवित्र रास्ते को पूरा कर भक्त आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के साथ बजरंगबली के दरबार में पहुंचते हैं. उनके लिए यह मार्ग तप और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)
ADVERTISEMENT


3/10
|
हनुमान गढ़ी में बाल हनुमान की प्रतिमा स्थापित है. इसमें वे माता अंजनी की गोद में विराजमान दिखाई देते हैं. यह स्वरूप भक्तों में वात्सल्य और भक्ति दोनों भाव देता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)


4/10
|
मंदिर का गर्भगृह अत्यंत शांत और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. यहां नियमित आरती, भजन और पूजा-अर्चना होती है. श्रद्धालु विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. जहां भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव मिलता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)
ADVERTISEMENT


5/10
|
हनुमान गढ़ी की संध्या आरती भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है. घंटों, शंख और हनुमान चालीसा की ध्वनि पूरे परिसर को आध्यात्मिक वातावरण से भर देती है. दीपों और मंत्रों से गूंजती भक्ति की शाम बहुत भव्य दिखाई देती है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)


6/10
|
मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को अयोध्या की रक्षा का दायित्व सौंपा था. इसी कारण राम मंदिर दर्शन से पहले हनुमान गढ़ी में दर्शन की परंपरा आज भी निभाई जाती है. महंत राजूदास कहते हैं अयोध्या की रक्षा आज भी संकटमोचन हनुमान करते हैं जिसका प्रमाण समय समय पर देखने को मिलता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)
ADVERTISEMENT


7/10
|
हनुमान गढ़ी का स्थापत्य किले जैसा दिखाई देता है. चारों ओर साधु-संतों के आश्रम और धार्मिक गतिविधियां इसे आध्यात्मिक केंद्र का स्वरूप प्रदान करती हैं. धार्मिक आस्था और प्राचीन स्थापत्य का संगम देश-दुनिया के भक्तों पर अलग छाप छोड़ता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)


8/10
|
देशभर से आने वाले श्रद्धालु हनुमान गढ़ी में दर्शन कर मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं. विशेष पर्वों और हनुमान जयंती पर यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है. बाकी हनुमान गढ़ी के लिए कोई दिन विशेष कहना ठीक नहीं होगा,क्योंकि यहां हर दिन श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़ दिखाई देती है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)


9/10
|
हनुमान गढ़ी का वर्तमान स्वरूप 18वीं शताब्दी में विकसित हुआ माना जाता है. इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नवाबी काल में भी इस मंदिर को संरक्षण मिला था. हनुमान गढ़ी सदियों पुरानी आस्था का जीवंत केंद्र और ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को प्रदर्शित करता है.(तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)


10/10
|
ऊंचाई पर स्थित होने के कारण हनुमान गढ़ी से अयोध्या शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है. शाम के समय मंदिर परिसर और आसपास की रोशनी भक्तों को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती है. यह रामनगरी का अद्भुत विहंगम दृश्य बड़ा प्यारा और मनलुभावन प्रतीत होता है. (तस्वीर-Raju Das Hanumangadhi Ayodhya / Whatsapp channel)
(यह खबर यूपी Tak के साथ इंटर्नशिप कर रहे आशुतोष पाण्डेय ने संपादित की है.)
ADVERTISEMENT










