यूपी का वो मंदिर जहां हनुमान जी की लेटी हुई है प्रतिमा, प्रयागराज के इस धाम की महिमा है अपरमपार
यूपी तक
• 02:39 PM • 18 May 2026
प्रयागराज के संगम तट पर स्थित 'लेटे हनुमान मंदिर' देश का एकमात्र ऐसा धाम है, जहाँ हनुमान जी की लगभग 20 फीट लंबी प्रतिमा विश्राम मुद्रा में विराजमान है. पौराणिक मान्यताओं और सदियों पुरानी आस्था के केंद्र इस मंदिर में दर्शन के बिना संगम की यात्रा अधूरी मानी जाती है.
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प्रयागराज के संगम क्षेत्र में स्थित लेटे हनुमान मंदिर सदियों पुरानी आस्था और भक्ति का जीवंत केंद्र है. यहां विराजमान हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा पूरे भारत में अनूठी मानी जाती है. विशेष पर्वों, मंगलवार और शनिवार को मंदिर में भव्य फूलों का श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इन तस्वीरों में मंदिर की आध्यात्मिक भव्यता, श्रृंगार परंपरा और भक्तिभाव की दिव्य झलक देखने को मिलती है.


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प्रयागराज का लेटे हनुमान मंदिर सदियों पुरानी आस्था, पौराणिक कथाओं और अद्भुत धार्मिक परंपराओं का केंद्र है. यहां विराजमान लगभग 20 फीट लंबी लेटी हुई प्रतिमा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत शांति का अनुभव कराती है. हर साल लाखों भक्त संगम स्नान के बाद यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता भगवान हनुमान की विशाल लेटी हुई प्रतिमा है. यह प्रतिमा लगभग 20 फीट लंबी मानी जाती है और देश में अपने प्रकार की अनोखी प्रतिमा है. प्रतिमा में हनुमान जी विश्राम मुद्रा में दिखाई देते हैं, जो भक्तों को शक्ति और समर्पण का संदेश देती है.


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लेटे हनुमान मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि प्रयागराज की आध्यात्मिक पहचान है. संगम तट के निकट स्थित यह मंदिर अपनी अद्भुत लेटी हुई हनुमान प्रतिमा के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. मान्यता है कि संगम स्नान के बाद यहां दर्शन किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है.
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गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम के पास स्थित यह मंदिर प्रयागराज की धार्मिक संस्कृति का केंद्र माना जाता है. कुंभ और माघ मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर के आसपास का वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर दिखाई देता है.


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मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिलती है. भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए प्रसाद चढ़ाते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है.
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लोक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद थके हुए हनुमान जी संगम किनारे विश्राम के लिए लेट गए थे. इसी घटना की स्मृति में यहां मंदिर की स्थापना हुई. मंदिर का इतिहास लगभग 600-700 वर्ष पुराना बताया जाता है.


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संगम के समीप स्थित यह मंदिर इतिहास और आस्था का दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है. कहा जाता है कि अनादि काल से इस मंदिर की धार्मिक महत्ता बनी रही है. और यह श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है.
(इस खबर को यूपी तक के साथ इंटर्नशिप कर रहे आशुतोष पाण्डेय ने संपादित किया है.)
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