बहरीन से लौटीं मॉडल प्रियंका पाठक, मिसाइल अटैक के बीच 15 दिन पार्किंग में गुजारे, अजान के वक्त करती थीं ये काम
विनय पांडेय
• 11:06 AM • 19 Mar 2026
UP News: बहरीन में फंसी शाहजहांपुर की मॉडल प्रियंका पाठक सुरक्षित वतन लौटीं. उन्होंने बताया कि कैसे ईरान की मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच उन्होंने 15 दिन पार्किंग में बिताए और अजान के वक्त जरूरी काम किए.
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ईरान युद्ध के बीच बहरीन में भारी गोलाबारी के बीच फंसे शाहजहांपुर के तिलहर निवासी भाजपा नेता संजय पाठक के परिवार ने राहत की सांस ली है. उनकी बेटी प्रियंका पाठक, दामाद अनुज पाठक और उनका बेटा सुरक्षित अपने घर पहुंच गए हैं. वतन की मिट्टी पर कदम रखते ही पूरे परिवार ने सुकून की सांस ली और ईश्वर का धन्यवाद किया.


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मॉडल प्रियंका पाठक ने बहरीन के खौफनाक मंजर को बयां करते हुए बताया कि वहां हर तरफ सिर्फ अराजकता का माहौल है. आसमान से गिरती मिसाइलों और फटने वाले ड्रोनों की गूंज ने उन्हें बुरी तरह डरा दिया था. प्रियंका के मुताबिक, धमाकों की आवाजें इतनी तेज और डरावनी थीं कि उन्हें अपनी और अपने मासूम बच्चे की जान की फिक्र हर पल सताती रहती थी.
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प्रियंका ने बताया कि वे जिस शेल्टर होम में रुके हुए थे, वह संयोग से अमेरिका के आर्मी एरिया (सैन्य क्षेत्र) के बिल्कुल पास था. इसी वजह से वह इलाका ईरान की मिसाइलों के सीधे निशाने पर आ गया था. अमेरिकी बेस को निशाना बनाने के लिए दागी जा रही मिसाइलें और ड्रोन उनके शेल्टर के आसपास ही गिर रहे थे, जिससे मौत का साया हमेशा उन पर मंडराता रहा.


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हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि बिल्डिंग के अंदर रहना सुरक्षित नहीं रह गया था. प्रियंका और उनके परिवार को मजबूरन दो दिन अपनी कार में और बाकी के दिन कार पार्किंग में बिताने पड़े. करीब 15 दिनों तक पार्किंग की असुरक्षित जगह को ही उन्होंने अपना ठिकाना बनाया, जहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था, लेकिन जान बचाने के लिए उनके पास कोई और चारा नहीं था.
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युद्ध के बीच जिंदगी की जद्दोजहद में परिवार ने एक अजीब लेकिन महत्वपूर्ण बात गौर की. प्रियंका ने बताया कि उन्हें समझ आया कि जब वहां अजान होती है, तब हमला रुक जाता है. अजान के उस शांत समय का उपयोग वे जल्दी-जल्दी नहाने, खाना खाने या जरूरी काम निपटाने के लिए करते थे. यह समय उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था.


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बहरीन के मौजूदा हालात को बयां करते हुए परिवार ने बताया कि वहां की स्थिति बहुत खराब है. उन्होंने अपनी आंखों से रिहायशी इमारतों पर ड्रोन गिरते हुए देखे. दहशत का आलम यह था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे अगले पल सुरक्षित रहेंगे या नहीं. प्रियंका के मुताबिक, वहां फंसे हर शख्स के चेहरे पर सिर्फ मौत का खौफ और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी.
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मौत के मुंह से निकलकर शाहजहांपुर पहुंचे इस परिवार ने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार को दिल से शुक्रिया कहा है. उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों की वजह से ही वे आज अपने अपनों के बीच सही-सलामत हैं. तिलहर में उनके घर पहुंचने पर शुभचिंतकों और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है, जो उनकी आपबीती सुनकर दंग हैं.
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