Amul की फैक्ट्री खोल भरे गुजरात के लोग, यहां वालों को बनाया Peon... अजय राय ये क्या बोल रहे?

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UP News: केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीते सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए)-2019 को लागू करने की घोषणा की. इस कानून को पारित किए जाने के चार साल बाद केंद्र के इस कदम के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आने वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने का रास्ता साफ हो गया है. केंद्र सरकार द्वारा CAA लागू करने पर यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय ने हमला बोला है. राय ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाने पर लेते हुए कहा कि 'जो नागरिक हैं उनको तो रोज़गार दे नहीं पा रहे हो...बाहर के लोगों को नागरिकता दोगे?' इसके अलावा, अजय राय ने आरोप लगाया कि वाराणसी में जो अमूल की फैक्ट्री खुली है, उसमें गुजरातियों को नौकरी दी जा रही है जबकि स्थानीय लोग झाड़ू लगाने का काम कर रहे हैं.

अजय राय ने कहा, "आज ध्रुवीकरण की राजनीति हो रही है. नागरिकता देने की बात कर रहे हो...जो नागरिक हैं उन्हें तो रोजगार दे नहीं पा रहे हो...आप भेदभाव कर रहे हो. यहां लोगों के पास काम नहीं है, नौजवान बेरोजगार घूम रहा है और आप दूसरे देश के लोगों को नागरिकता देने की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हो. आपने 2 करोड़ नौकरी देने की बात कही थी, वो कहां गईं. 10 साल में 20 करोड़ नौकरी दीं क्या? 20 करोड़ नौकरी मिली तो नहीं बल्कि चली गईं."

 

 

राय ने पीएम मोदी को यूं घेरा

राय ने कहा, "काशी जहां के मोदी जी सांसद हैं वहां के लोगों को काम मिल ही नहीं रहा है. अभी अमूल की फैक्ट्री आपने खोली है, गुजरात के लोगों को लाकर भर रहे हो...यहां के लोग पियोन और झाड़ू लगाने का काम कर रहे हैं. मोदी जी और अमित शाह जी को कहना चाहता हूं कि वाराणसी के लोगों को काम दे दीजिए."

अजय राय ने और क्या-क्या कहा, उसे आप नीचे शेयर किए गए पोस्ट में सुन सकते हैं-

क्या होगा CAA लागू होने से?

 बता दें कि सीएए के नियम जारी हो जाने के साथ ही अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इन तीन देशों के प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देना शुरू कर देगी.  गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 कहे जाने वाले ये नियम सीएए-2019 के तहत पात्र व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए आवेदन करने में सक्षम बनाएंगे."    

 

 

प्रवक्ता ने कहा, "आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में जमा किए जाएंगे जिसके लिए एक वेब पोर्टल उपलब्ध कराया गया है." एक अधिकारी ने कहा कि आवेदकों से कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा.

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गौरतलब है कि  सीएए को दिसंबर, 2019 में संसद में पारित किया गया था और बाद में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन इसके खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे. यह कानून अब तक लागू नहीं हो सका था क्योंकि इसके कार्यान्वयन के लिए नियमों को अब तक अधिसूचित किया जाना बाकी था. बता दें कि ये नियम अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को हमारे देश में नागरिकता प्राप्त करने में सक्षम बनाएंगे.
 
 

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