धार्मिक भावनाओं के जरिए कोर्ट को प्रभावित करना न्याय के मंदिर लिए सही नहीं: इलाहाबाद HC
इलाहाबाद हाई कोर्ट.फोटो: पंकज श्रीवास्तव

धार्मिक भावनाओं के जरिए कोर्ट को प्रभावित करना न्याय के मंदिर लिए सही नहीं: इलाहाबाद HC

मंदिरों और मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों के प्रयोग और उसकी आवाज की सीमा को लेकर याची की अवमानना याचिका खारिज कर हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी दी है. हाई कोर्ट ने कहा है कि 'धार्मिक भावनाओं के जरिए कोर्ट को प्रभावित करना न्याय के मंदिर के लिए उचित नहीं है.'

कोर्ट ने इस मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता के व्यवहार पर असंतोष जताया है. बता दें कि याची की तरफ से अवमानना याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट के 2013 में दिए आदेश का पालन नहीं हो रहा है. कोर्ट ने प्रदेश में मस्जिदों और मंदिरों में लाउडस्पीकरों के प्रयोग और उसकी ध्वनि सीमा को लेकर एक नीति बनाने का निर्देश दिया था. याची ने कहा कि सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया और आदेश का उल्लंघन बताया.

कोर्ट इससे पहले भी इसे प्रायोजित मुकदमा बताते हुए मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर के संबंध में दायर अवमानना याचिका को खारिज किया था. इस मामले में पिछले आदेश में कोर्ट कह चुकी है कि मस्जिदों लाउडस्पीकर लगाकर अजान देना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है.

आदेश में बदायूं के ककोड़ा थाना अंतर्गत दो मस्जिदों में सीमित आवाज के साथ लाउडस्पीकर लगाने की छूट दी गई थी और कहा गया था कि लाउडस्पीकर के उपयोग के संबंध में नीति तैयार करें. याची की तरफ से इस आदेश का उल्लंघन बताया गया था.

वहीं, कोर्ट ने कहा कि 2013 का आदेश अंतरिम था और वो मामला अभी हाई कोर्ट में विचाराधीन है. उसका फैसला अभी आना है, इसलिए ये अवमानना का मामला नहीं बन रहा है.

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