कोणार्क से पहले यूपी के इस जिले में बन गया था सूर्य मंदिर, 7 तस्वीरों में देखें इसका पूरा इतिहास

नाहिद अंसारी

• 05:14 PM • 19 May 2026

महोबा का प्राचीन राहिलिया सूर्य मंदिर करीब हजार साल पुराने इतिहास और चंदेलकालीन वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है. कोणार्क सूर्य मंदिर से भी सदियों पुराना माना जाने वाला यह मंदिर आज भी बुंदेलखंड की गौरवशाली विरासत की कहानी बयां करता है.

follow google news
1

1/7

|

इतिहास के पन्नों में कई अहम घटनाएं समेटे महोबा का सूर्य मंदिर सदियों का साक्षी है. कहा ये भी जाता है कि कोणार्क के सूर्य मंदिर से काफी समय पहले ही चंदेला शासन में बुंदलेखंड में ऐसे पत्थर थे, जहां से सूर्य की पूजा की जाती थी. 

2

2/7

|

महोबा कभी चंदेल राजाओं की राजधानी हुआ करता था. इतिहासकारों के मुताबिक इस सूर्य मंदिर का निर्माण चंदेल शासक राहिल देव वर्मन ने करीब 9वीं से 10वीं शताब्दी के बीच कराया था. मंदिर को राहिलिया सूर्य मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि यह राहिलिया गांव के पास स्थित है. कहा जाता है कि उस दौर में चंदेल राजा सूर्य देव की पूजा को शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानते थे.

3

3/7

|

महोबा का नाम भी महोत्सव नगर से निकला माना जाता है. यह इलाका चंदेल शासकों की कला, स्थापत्य और जल प्रबंधन व्यवस्था के लिए काफी प्रसिद्ध रहा है. यहां बने तालाब, मंदिर और किले आज भी उस गौरवशाली इतिहास की कहानी कहते हैं.

4

4/7

|

ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन महोबा का यह सूर्य मंदिर उससे कई सदियों पुराना माना जाता है. जहां कोणार्क मंदिर 13वीं शताब्दी में बना था, वहीं महोबा का सूर्य मंदिर 9वीं या 10वीं शताब्दी का बताया जाता है. यही वजह है कि इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के बीच यह मंदिर काफी खास माना जाता है.
 

5

5/7

|

इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी वास्तुकला है. मंदिर को बड़े बड़े ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है. पत्थरों को इस तरह जोड़ा गया कि हजार साल बाद भी यह संरचना मजबूती से खड़ी है. मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का शानदार उदाहरण माना जाता है. 

6

6/7

|

जानकारी के अनुसार, 12वीं सदी में ही इस मंदिर के स्वरूप पर सबसे पहला वार कुतुबुद्दीन एबक ने किया और धन की लालसा से इसका कुछ हिस्सा गिरा दिया था. मंदिर के अवशेष रहेलिया सागर तट तालाब के किनारे दूर तक फैले देखे जा सकते हैं.

7

7/7

|

अब प्रशासन और पर्यटन विभाग की तरफ से इस मंदिर को नई पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है. महोबा के इस प्राचीन सूर्य मंदिर को पर्यटन के बड़े केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर सही तरीके से प्रचार प्रसार किया जाए तो यह जगह देश ही नहीं बल्कि विदेशों के पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकती है. 

 

(इस खबर को यूपी तक के साथ इंटर्नशिप कर रहे हर्ष पाण्डेय ने संपादित किया है.) 

रिलेटेड फोटो गैलरी