यूपी की सड़कों पर दिखा 308 पहियों वाला 'बाहुबली ट्रक', बेलज्यिम से चंदौली तक कैसे पहुंचा
उदय गुप्ता
• 01:47 PM • 28 Sep 2026
बेल्जियम से आई बायो पॉलीमर प्लांट की विशालकाय मशीन को लखीमपुर ले जा रहा 308 पहियों वाला बाहुबली ट्रक चंदौली में रुक गया है. ओडिशा के पारादीप पोर्ट से चलकर झारखंड और बिहार होते हुए यह यूपी पहुंचा है.
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उत्तर प्रदेश के चंदौली में इन दिनों एक विशालकाय ट्रक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यह कोई साधारण ट्रक नहीं है, बल्कि यह बेल्जियम से आई बायो पॉलीमर प्लांट की एक बेहद भारी और विशाल मशीन को लेकर जा रहा है. इस महाबली ट्रक में कुल 308 पहिए लगे हुए हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग उमड़ रहे हैं.


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मशीन का यह सफर इसी साल अप्रैल महीने में बेल्जियम से समुद्र के रास्ते शुरू हुआ था. करीब एक महीने के लंबे सफर के बाद, यह भारी-भरकम मशीन मई में ओडिशा के पारादीप पोर्ट (बंदरगाह) पर पहुंची. वहां जरूरी कागजी कार्रवाई और क्लीयरेंस मिलने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लग गया, जिसके बाद इसे सड़क मार्ग से रवाना किया गया है.
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ओडिशा के पारादीप पोर्ट से निकलने के बाद, इस 308 पहियों वाले विशाल ट्रक ने झारखंड और बिहार का रास्ता तय किया. कई राज्यों को पार करते हुए, दो महीने के सफर के बाद यह महाबली ट्रक आखिरकार उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ है. इसका अंतिम लक्ष्य (डेस्टिनेशन) लखीमपुर स्थित बलरामपुर चीनी मिल कुंभी है.


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फिलहाल यह ट्रक चंदौली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे 19 (NH-19) के रिंग रोड पर पिछले तीन दिनों से रुका हुआ है. ट्रक के रुकने का कारण आगे का संकरा रास्ता है. लॉजिस्टिक टीम के प्रबंधक अनेक भारती के अनुसार, मशीन की अत्यधिक ऊंचाई और चौड़ाई के कारण रास्ते में काफी बाधाएं आ रही हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है.
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रास्ते में आने वाले ओवरब्रिज, संकरी सड़कों और बिजली के तारों जैसी बाधाओं को दूर करने के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं. संबंधित विभागों से अनुमति लेकर, कहीं जेसीबी की मदद से नया रास्ता बनाया जा रहा है, तो कहीं पोल और तारों को हटाकर क्रेन से रास्ता साफ किया जा रहा है ताकि ट्रक सुरक्षित आगे बढ़ सके.


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इस बाहुबली ट्रक के रुकने की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई. बिहार के दुर्गावती से आए अब्दुल वारिस और स्थानीय महिला नीलम ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में पहली बार इतना बड़ा ट्रक देखा है. लोग इस विशाल मशीन के साथ जमकर सेल्फी और फोटो ले रहे हैं.
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मरीन इंजीनियर संजय यादव भी इस ट्रक को देखने पहुंचे. उनका कहना था कि जल मार्ग के बाद सड़क मार्ग से इतनी बड़ी चीज को यहां तक लाना बहुत सुखद और हैरानी भरा है. तमाम अड़चनों को पार करते हुए, लॉजिस्टिक टीम को उम्मीद है कि यह 308 पहियों वाला ट्रक अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर लखीमपुर पहुंच जाएगा.
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