कहीं भी कब्र बना दो लेट सकता हूं…लखनऊ, चाय और महबूब की जगह मां पर लिखने वाला शायर ‘मुनव्वर’
‘आपको पता है अब मुझे कुछ लोग आतंकवादी तक कहने लगे है. मैं जब भी सजदा करता हूं तो अपने मुल्क की मिट्टी को चूमता…
ADVERTISEMENT

‘आपको पता है अब मुझे कुछ लोग आतंकवादी तक कहने लगे है. मैं जब भी सजदा करता हूं तो अपने मुल्क की मिट्टी को चूमता हूं और आज मैं आतंकवादी हो गया’, इतना बोलते ही बोलते मुनव्वर राना की जुबान लड़खड़ाने लगी और उन्होंने चुप्पी साध ली. कुछ देर बाद फिर उन्होंने बोला..मैं अपने आपको इतना समेट सकता हूं, कहीं भी कब्र बना दो लेट सकता हूं.

