'मैंने एक हत्या की थी', बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह ने ऐसा क्यों कहा था, देखें वो पूरा मामला

'मैंने एक हत्या की थी', बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह ने ऐसा क्यों कहा था, देखें वो पूरा मामला
फोटो: चंद्रदीप कुमार, इंडिया टुडे

'मैंने एक हत्या की थी', ये कहने वाले कोई और नहीं बल्कि कैसरगंज से बाहुबली बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह हैं. कहते हैं कि गोंडा में कुछ भी होता, उसमें कहीं ना कहीं बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह का हाथ माना जाता है. ये भी छोड़िए 6 बार के सांसद हैं और 11 साल से कुश्ती फेडरेशन के अध्यक्ष हैं.

अब सवाल ये है कि आखिर ये बलम आदमी कौन हैं, तो आज आपको हम बिल्कुल तफसील से समझाएंगे गुरु. पहले बयान सुनिए, जो उन्होंने इंडिया टुडे के सहयोगी चैनल लल्लनटॉप को दिया था. (वीडियो पर क्लिक कर बयान सुनें).

जिस तरीके से कमरे के सामने पर हत्या की बात कबूल रहे हैं, ठीक वैसे ही बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह का इतिहास है. अघ्योध्या के बगल का जिला है, गोंडा. उस जिले में चट्टान की तरह लंबे समय बृजभूषण शरण सिंह खड़े हैं.

बृजभूषण शरण सिंह खुद बताते हैं कि वो एक समान्य परिवार से हैं. उस वक्त गोंडा में राजा का परिवार राजनीतिक रूप से सक्रिय था. तब बृजभूषण शरण सिंह ने अपने छात्र संघ से शुरुआत की. सबसे पहले साकेत महाविद्यालय फैजाबाद (अयोध्या) में 1979 में हुए छात्र संघ चुनाव में भारी मतों से महामंत्री निर्वाचित हुए. उस वक्त मनकापुर में राज घराने का दबदबा था.

इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह 1988 ब्लॉक प्रमुख नवाबगंज के चुनाव मनकापुर राज घराने कुंवर आनंद सिंह को हरा दिया. उस वक्त कहा जाता था कि बृजभूषण शरण सिंह ने आनंद सिंह के साथ राजनीति के गुर सीखे थे.

इस चुनाव के बाद धीरे-धीरे बृजभूषण शरण सिंह बड़े खिलाड़ी बनते गए. उन्हें 1989 में एमएलसी स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया, लेकिन इस बार बृजभूषण फेल हो गए. लेकिन इसके बाद वह राममंदिर मुद्दे पर सक्रिय हो गए.

बृजभूषण शरण सिंह इस बात का भी दावा करते हैं कि बाबरी विध्वंस में गैंती और फावड़े का जुगाड़ उन्होंने ही किया था. इसके बाद उनकी छवि हिंदूवादी नेता की हो गई. एक समय बृजभूषण शरण सिंह लालकष्ण आडवाणी के गाड़ी के सारथी भी बने थे. बीजेपी ने फिर पहली बार 1991 में बृजभूषण को गोंडा से उम्मीदवार बनाया और एक बार फिर वह कांग्रेस के आनंद सिंह को हरा कर पहली बार सांसद बने.

इसके बाद डाटा का केस लगा, तो बृजभूषण को जेल भी जाना पड़ा. लेकिन तब तक बृजभूषण शरण सिंह का अपना दबदबा बन चुका है. हालात ये थे कि 1996 में बृजभूषण ने अपनी पत्नी केतकी सिंह को गोंडा से उम्मीदवार बनाया और वह जीत गई. फिर 1999 में वापस बृजभूषण शरण सिंह सांसद बन गए. 2004 बलरामपुर से बृजभूषण शरण सिंह सांसद बने.

अभी तक बीजेपी से सब कुछ सही चला रहा था, लेकिन विवाद हुआ, तो राम मंदिर का हीरो बनने वाले बृजभूषण शरण सिंह मुलायम सिंह यादव की सपा में चल गए. पार्टी बदली लेकिन रिजल्ट नहीं बदला. 2009 लोकसभा कैसरगंज से सपा से चुनाव जीत गए. इसके बाद नरेंद्र मोदी का दौर आया, तो वापसी बीजेपी में हो गई और 2014 और 2019 में कैसरगंज से बीजेपी के सांसद बने. लेकिन 2022 आते-आते एक बार बृजभूषण रुख बदला हुआ दिख रहा है. आजकल वह बीजेपी पर बम फायर रहते हैं.

11 साल से कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद पर काबिज बृजभूषण की पत्नी सांसद रह चुकी हैं. बृजभूषण के एक बेटे गोंडा सदर से विधायक हैं, जबकि दूसरे बेटे करण भूषण सिंह भारतीय कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष हैं. देवी पाटन मंडल के चारो जिलों गोंडा बहराइच बलरामपुर व श्रावस्ती जनपद में 54 इंटर और डिग्री कालेजों भी बृजभूषण के पास हैं.

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