UPSI भर्ती: हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उठाए सवाल, यहां जानिए धांधली के आरोप की पूरी कहानी

UPSI भर्ती: हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उठाए सवाल, यहां जानिए धांधली के आरोप की पूरी कहानी
तस्वीर: यूपी तक.

पिछले काफी दिनों से उत्तर प्रदेश में SI भर्ती में कथित घोटाले का मामला काफी चर्चा में है. जहां एक तरफ सरकार और भर्ती बोर्ड लगातार कह रहा है कि किसी तरह की कोई धांधली एग्जाम में नहीं हुई है, वहीं अभ्यार्थियों ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए लखनऊ में डेरा जमा लिया. कहा गया कि बड़े स्तर पर धांधली हुई है. यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए. जब ये मामला कोर्ट पहुंचा तो धीरे-धीरे इससे जुड़ी चीजें साफ होती जा रही हैं. इस रिपोर्ट में जानिए कि अभी हाल ही में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस मामले पर कुछ कह रही है. इस खबर की शुरुआत में शेयर किए गए वीडियो पर क्लिक कर इस पूरी न्यूज रिपोर्ट को देखा और सुना भी जा सकता है.

शुरुआत से जानिए UPSI भर्ती से जुड़े विवाद की पूरी कहानी

दरअसल मार्च 2021 में उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी पुलिस दरोगा भर्ती का ऐलान किया था. इसके बाद 1 अप्रैल 2021 से 15 जून 2021 तक 12 लाख बच्चों ने फॉर्म भरे. कुल 9,534 पदों पर भर्ती होनी थी. मार्च में ऐलान होने के बाद अप्रैल 2021 में भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ और सितंबर में कोरोना के चलते एग्जाम की तारीख बदल दी गई. इसके बाद 12 नवंबर से 2 दिसंबर तक एग्जाम ऑनलाइन मोड में संपन्न हुआ. 7.61 लाख अभ्यर्थियों ने एग्जाम दिया. 8 जनवरी 2022 को आचार संहिता लागू हो गई तो यह तय हो गया कि अब इसका रिजल्ट यूपी में नई सरकार बनने के बाद आएगा.

जैसे-जैसे अभ्यर्थी डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन और शारीरिक परीक्षण के लिए आते गए वैसे-वैसे परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होता गया. बाद में पुलिस ने भी खुद खुलासे का दावा किया. योगी सरकार ने परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी एक ऐसी एजेंसी, NSEIT को दे दी जिसको लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया कि ये पहले से ही 6 राज्यों में प्रतिबंधित है. अब आईए कोर्ट की कार्रवाई के बारे में भी जान लेते हैं. 25 जुलाई को हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में हुई इस मामले पर सुनवाई हुई.

इस मामले में याचिकाकर्ता संदीप परिहार और 28 लोग हैं. जस्टिस आलोक माथुर की बेंच में इसे सुना गया. मुख्य रूप से 2 आरोप लगाए गए थे. पहला, एग्जाम के दौरान ही 23 नवंबर 2021 को IPC के सेक्शन 116,120B, 419, 420, 467,468, 471 के तहत गोरखपुर के रामगढ़ पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई गई और कहा गया कि ऐसे कई लोग थे, जिनके अंडर में एग्जाम सेंटर था और उन्होंने पेपर सॉल्वर बैठा रखे थे. जो ऑनलाइन पेपर सॉल्व कर रहे थे और ये एग्जाम सेंटर NSEIT (एग्जाम कंडक्ट करने वाली एजेंसी) ने अपॉइंट किए थे. FIR दर्ज की गई थी गोरखपुर STF की तरफ से.

अहम बिंदु

इसके बाद एक के बाद एक गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज , बनारस, आगरा, बरेली और लखनऊ में कुल 33 FIR दर्ज किए गए. इसके अलावा दूसरा बड़ा आरोप यहथा कि एग्जाम कंडक्ट करने वाली एजेंसी NSEIT पर पहले भी इसी तरह के आरोप 2017 की यूपी पुलिस भर्ती में लगाए गए थे. इसकी जांच में आरोप सही पाए गए थे. तब एग्जाम से पहले ही पेपर लीक हो गया था. ऐसे में सवाल उठाया गया कि फिर से इस एजेंसी से क्यों एग्जाम करवाया गया.

इसपर कोर्ट ने कहा कि हम उस कारण को नहीं समझ पा रहे हैं. आखिर क्यों इतना कुछ होने के बाद भी राज्य सरकार ने अभी तक उसी एजेंसी से एग्जाम करवाया, जो पहले से पेपर लीक मामले में आरोपी है. कहा गया कि इस मामले को 28 जुलाई को टॉप टेन मामलों में सूचीबद्ध करें और जितनी भी FIR दर्ज की गईं हैं, उसमें जांच के बाद क्या आया और राज्य सरकार ने क्या निर्णय लिया गया है, ये बताया जाए. साथ ही साथ एग्जाम को कंडक्ट करने वाली एजेंसी NSEIT से ये एग्जाम करवाने के कारण के साथ यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के सचिव को पेश होने के लिए कहा गया.

अब यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के सचिव हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इन सभी सवालों के जवाब के साथ पेश होंगे. इस आदेश के बाद जो अभ्यार्थी मामले को लेकर लड़ रहे थे, उन्होंने राहत की सांस ली है. बहरहाल इस आदेश ने एक बार फिर UPSI Scam को जिंदा कर दिया है. एक बार फिर सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है.

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