रामपुर: उपचुनाव से पहले कौन किस पर भारी? क्या है यहां का जातीय और धार्मिक समीकरण, जानिए
रामपुर रेलवे स्टेशन की एक तस्वीर.फोटो: आमिर खान

रामपुर: उपचुनाव से पहले कौन किस पर भारी? क्या है यहां का जातीय और धार्मिक समीकरण, जानिए

रामपुर उपचुनाव में अब गिनती के कुछ दिन ही बचे हैं. इस बार रामपुर में सिर्फ दो पार्टियों के बीच ही लड़ाई है. क्योंकि बीजेपी और सपा को छोड़कर किसी पार्टी ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है. कांग्रेस ने आजमगढ़ और रामपुर में दोनों जगह उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, तो वहीं मायावती ने अखिलेश यादव को फंसाते हुए, रामपुर में प्रत्याशी नहीं उतारा है. वहीं, दूसरी ओर सपा और बीजेपी की बात करें, तो सारा खेल आजम खान के इर्द-गिर्द सेट हो गया. क्योंकि अखिलेश यादव ने प्रत्याशी तय करने से लेकर उसे जिताने की जिम्मेदारी आजम खान के कंधे पर डाल दी है. वहीं, बीजेपी ने कभी आजम खान के करीबी रहे धनश्याम सिंह लोधी को टिकट दे दिया है.

जानिए क्या है चुनाव से पहले रामपुर का माहौल, जातीय और धार्मिक समीकरण

सबसे पहले बात करते हैं समीकरण की, तो रामपुर ऐसा इलाका है, जहां मामला कहीं ना कहीं हिंदू बनाम मुस्लिम का हो जाता है. क्योंकि यहां पर 50.57 फीसदी और हिंदू की संख्या 45.97 फीसदी है. इसके अलावा करीब 3 फीसदी के करीबी सिख समुदाय के लोग हैं. वैसे तो इलाके में आजम खान का दबदबा है, तो मुस्लिम वोट लगातार सपा को मिलता रहा है. लेकिन नवाब परिवार हमेशा आजम खान के विरोध में रहा है.

हमेशा से कांग्रेसी रहा नवाब परिवार इस बार बीजेपी को समर्थन कर रहा है. स्वार इलाके में नवाब परिवार से हमजा नवाब ने अब्दुल्ला आजम को विधानसभा चुनाव में ठीक-ठाक टक्कर भी दी थी. वहीं, हिंदू समुदाय में आजम खान की पैठ है. हालांकि, यहां से सिख समुदाय का समर्थन किसान आंदोलन से पहले लगातार बीजेपी को मिलता रहा है.

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रामपुर रेलवे स्टेशन की एक तस्वीर.
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