आजमगढ़-रामपुर उपचुनाव: जानें कहां फंस सकती है अखिलेश-आजम की गाड़ी, सबसे बड़ी चुनौती यही!

आजमगढ़-रामपुर उपचुनाव: जानें कहां फंस सकती है अखिलेश-आजम की गाड़ी, सबसे बड़ी चुनौती यही!
आजम खान और अखिलेश यादव. फोटो: विक्रम शर्मा/ इंडिया टुडे

उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उप चुनाव को लेकर अब माहौल अपने चरम पर पहुंच गया है. वैसे तो दोनों जगहों पर चुनावी चकल्लस की बहार है, लेकिन मामला ज्यादा दिलचस्प आजमगढ़ में बन गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी, तीनों दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं. एक वजह यह भी कि अखिलेश के लिए अगर कहीं मामला फंसा समझा जा रहा है, तो वह आजमगढ़ की ही सीट है. सिर्फ अखिलेश नहीं बल्कि इस बार मामला आजम खान के लिए भी फंसा है. आइए इसे समझते हैं.

अहम बिंदु

दरअसल, आजमगढ़ में बसपा ने अपना प्रत्याशी उताकर मामला का त्रिकोणीय बना दिया है. यहां पर बसपा ने शाह आलम उर्फ गूड्डू जमाली को मैदान में उतारा है. वहीं, बीजेपी ने भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल निरहुआ को मैदान में उतारा है. अखिलेश यादव के बाद इस सीट पर यादव परिवार से धर्मेंद्र यादव की एंट्री हुई है. अब मामला इसलिए फंसा है कि यह लोकसभा सीट मुस्लिम और यादव बाहुल्य है. एक अनुमान के मुताबिक, आजमगढ़ लोकसभा सीट पर करीब 19 लाख मतदाता हैं, जिसमें सबसे ज्यादा करीब साढे़ चार लाख यादव वोटर्स हैं. मुस्लिम और दलित तीन-तीन लाख हैं जबकि शेष अन्य जाति के हैं. अबतक मुस्लिम यादव समीकरण का फायदा सपा को मिलता रहा है. जब-जब दलित और मुस्लिम एक साथ आए हैं, तो बसपा जीती. इस बार बसपा ने एक बार फिर दलित और मुस्लिम कार्ड खेला है.

अब राजनीति के जानकारों की मानें, तो 2022 के विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन करने के बाद भी मायावती को जाटव का भरपूर सर्मथन मिला है. ऐसे में गूड्डू जमाली की दावेदारी ने मामले को रोचक बना दिया है. वहीं, दिनेश लाल यादव निरहुआ के आने के बाद ऐसी चर्चा है कि सपा के यादव वोट बैंक में भी सेंध लग सकती है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनावों में भले अखिलेश को यहां से जीत मिली थी, लेकिन निरहुआ का प्रदर्शन भी ठीक-ठाक ही माना गया था. निरहुआ ने अहीर रेजिमेंट जैसे मुद्दों को उछाला है और यादव वोटों को साधने की कोशिश की है. अब सवाल ये है कि अगर दलित वोट बसपा के साथ जाता है और यादव वोटर्स का का पूरा सर्मथन सपा को नहीं मिलता है, तो मुस्लिम वोट बैंक बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. फिर यहां एक बार गुड्डू जमाली का फैक्टर अहम हो जाता है.

अब बारी आती है आजम खान की. विधानसभा चुनाव के बाद आजम खान सपा से नाराज बताए गए. सपा के मुस्लिम नेताओं में खलबली दिखी. लगा कि जो मुस्लिम अभी तक अखिलेश के साथ एकजुट खड़े थे, उनमें फूट दिख रही है. ऐसे में अखिलेश यादव ने आजम मानने के लिए खूब मेहनत की. राज्यसभा से कपिल सिब्बल को टिकट दिया. रामपुर सीट पर प्रत्याशी के लिए पूरी छूट दी. आजम ने ही आसिम राजा को उम्मीदवार बनाया. यही नहीं आजम के दो करीबियों को एमएलसी भी बनाया.

अगर इन सबके बीच आजमगढ़ में कहीं मुस्लिम वोट को लेकर बाजी गूड्डू जमाली मार देंगे तो तो सवाल जरूर खड़ा होगा कि आखिर आजम को मनाने का कितना फायदा अखिलेश यादव को हुआ. हालांकि, आजम खान के असर का असल आकलन 2024 के लोकसभा चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों में ही होगा. इसके बावजूद अगर आजमगढ़ के मामला फंसता है, तो अखिलेश और आजम दोनों के लिए अच्छे संकेत नहीं होंगे.

संबंधित खबरें

No stories found.
UPTak - UP News in Hindi (यूपी हिन्दी न्यूज़)
www.uptak.in