गांधी परिवार का गढ़ थी अमेठी, स्मृति ने यूं ढहाया पूरा दुर्ग

गांधी परिवार का गढ़ थी अमेठी, स्मृति ने यूं ढहाया पूरा दुर्ग
अमेठी संसदीय क्षेत्र के जगदीशपुर में जनसभा के दौरान स्मृति ईरानी फोटो: मनीष अग्निहोत्री/ इंडिया टुडे

अगर कोई कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी सबसे तीखी कसक के बारे में पूछे तो हो सकता है कि उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में अमेठी में मिली शिकस्त याद आ जाए। 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था खुद उसके तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी का अमेठी की अपनी सीट हार जाना। वह सीट जिसे गांधी परिवार का गढ़ समझा जाता था।

वही अमेठी जिसकी बात गांधी परिवार से शुरू हो जाती थी और गांधी परिवार पर खत्म। उसी अमेठी ने गांधी परिवार को बता दिया कि उनका वर्चस्व अब अमेठी में खत्म हो चुका है। अब अमेठी की सांसद स्मृति ईरानी हैं।

साल 1967 में अमेठी लोकसभा सीट वर्चस्व में आई थी। तब से लेकर अब तक इस लोकसभा में नेहरू-गांधी परिवार का ही दबदबा रहा है। 1967-2019 से अब तक सिर्फ 3 बार ही ऐसा हुआ है जब इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस की हार हुई हो। इस सीट पर कांग्रेस सबसे पहली बार 1977, दूसरी बार 1998 और तीसरी बार 2019 में हारी।

कांग्रेस की इन तीन हार में दिलचस्प आंकड़ा यह है कि कांग्रेस ये तीनों चुनाव 21-21 साल के अंतर पर हारी है। अब तक कांग्रेस को हुई तीन हार में एक बार लोक दल जबकि 2 बार बीजेपी से उसे शिकस्त मिली।

राहुल के लिए अमेठी की सीट क्यों खास थी?

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधीफोटो: विक्रम शर्मा/ इंडिया टुडे

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट इसलिए खास थी क्योंकि इस सीट से उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मां व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जीत हासिल की थी।

उनके लिए अमेठी सीट इसलिए भी खास थी क्योंकि इसी अमेठी की सीट से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की सक्रिय पारी साल 2004 में शुरू की थी। अमेठी की जनता ने उन्हें 2004, 2009 और 2014 का लोकसभा चुनाव एक तरफा जिताया था।

हालांकि, 2019 में राहुल ने 2 लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ा था। अमेठी में जरूर वह हार गए थे, लेकिन केरल से वायनाड से उन्हें जीत मिली थी। ऐसा भी पहली बार हुआ था जब कोई कांग्रेस अध्यक्ष अपना चुनाव हार गया हो।

आइए जानते हैं वे कारण, जिनकी वजह से अमेठी गंवा बैठे राहुल गांधी

1. 2014 में बेशक राहुल अमेठी से चुनाव जीते थे, लेकिन इस चुनाव में बीजेपी की स्मृति ईरानी को भी 3 लाख वोट मिले थे। स्मृति ईरानी ने कहा था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मात्र 20 दिन पहले ही वह अमेठी में प्रचार करने पहुंची थी और इतने कम समय में उन्हें 3 लाख वोट मिल जाने का मतलब था कि अमेठी के लोग राहुल से खुश नहीं थे।

2. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में राहुल को अमेठी के किले में सेंध लगती हुई दिखी। यही उनकी हार का आगे चलकर कारण भी बनी। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में अमेठी विधानसभा क्षेत्र की 5 में से एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीत पाई थी। दरअसल, अमेठी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 5 में 4 सीट जीती थीं जबकि सपा के खाते में 1 सीट गई थी।

वहीं, एक इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने अपनी जीत का कारण बताया हुए कहा था कि राहुल गांधी का अमेठी की जनता से संवाद न होना उनकी हार का कारण बना। उन्होंने बताया कि 2014 में हार के बाद उन्होंने अमेठी की जनता से संवाद नहीं तोड़ा बल्कि केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार की मदद से अमेठी की जनता को विकास से जोड़ा और योजनाओं का लाभ दिलवाया।

इसके अलावा, अमेठी में बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी के लिए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेताओं का प्रचार राहुल गांधी को इस बात का संकेत दे गया था कि बीजेपी इस सीट को किसी भी हाल में जीतना चाहती है। इसी के चलते राहुल ने 3 दिन खुद अमेठी में रहकर चुनाव प्रचार की बागडोर संभाली थी।

इतना ही नहीं पूरे कांग्रेस परिवार ने भी राहुल के लिए रोड शो किया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने खुद 8 दिन तक अमेठी में रहकर अपने भाई के लिए वोट मांगे थे। लेकिन 2 जगह से चुनाव लड़ना इस बात को समझाने में आसानी कर देता है कि खुद राहुल को पता था कि अमेठी का किला गिरने वाला है। उस दौरान 2 जगह से चुनाव लड़ने के पीछे राहुल ने यह तर्क दिया था कि उन्होंने देश को एकसूत्र में बांधने के लिए ऐसा किया था। लेकिन जनता के बीच वह शायद आत्मविश्वास खो बैठे थे।

यूपी में अगले साले विधानसभा चुनाव हैं। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के नेतृत्व में यूपी में अपनी हालत सुधारने को लेकर पूरा दम-खम झोंक रखा है। प्रियंका और राहुल के दिमाग में कहीं न कहीं अमेठी की हार भी बैठी होगी। अब यह देखना रोचक होगा कि क्या 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अमेठी का अपना खोया गढ़ जीतने में सफल होती है, या इस बार भी बाजी उनके हाथ से निकल जाएगी।

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