जब अपना गांव छोड़कर सैफई में बसने को मजबूर हुए मुलायम सिंह के दादा
सैफई की साल 2006 की एक तस्वीर(फोटो: मनीष अग्निहोत्री/इंडिया टुडे)

जब अपना गांव छोड़कर सैफई में बसने को मजबूर हुए मुलायम सिंह के दादा

इटौली छोड़कर सैफई में बसे थे मुलायम सिंह के दादा, दिलचस्प किस्सा

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक जगह है- सैफई. एक वक्त था, जब सैफई विकास के लिए तरसता हुआ एक गांव था. मगर समाजवादी पार्टी (एसपी) के प्रदेश की सत्ता में आने के बाद सैफई की सूरत ही बदल गई. आज सैफई में कई सुविधाओं के साथ-साथ शानदार स्कूल हैं, डिग्री कॉलेज हैं, यहां तक कि मेडिकल कॉलेज भी है.

उत्तर प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री - एसपी के फाउंडर मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव - सैफई से ही ताल्लुक रखते हैं.

आजादी से पहले मुलायम के दादा सैफई में आए थे तो यह भी भारत के दूसरे गांवों की तरह ही झोंपड़ियों और कच्चे मकानों का गांव था. मुलायम के दादा खड़गजीत सिंह यादव फिरोजाबाद जिले के इटौली से आकर सैफई में बसे थे.

'समाजवाद का सारथी' नाम की किताब में बताया गया है कि इटौली में रहते हुए खड़गजीत सिंह के साथ एक ऐसी घटना हुई थी कि उसके चलते पूरे परिवार की ही जिंदगी छिन्न-भिन्न हो गई थी. इसी कारण वह सैफई में आकर बसे थे.

एक वक्त था, जब खड़गजीत सिंह का इटौली में बड़ा सम्मान था. गांव की बहुत सी समस्याओं का निपटारा इसी परिवार के दालान में होता था. खड़गजीत सिंह गरीब और कमजोरों की मदद करने के लिए भी जाने जाते थे. यह परिवार आजादी के आंदोलन में भी गुप्त रूप से शरीक होता था. खड़गजीत सिंह अंग्रेजों के खिलाफ लोगों को एकजुट करते, खेतिहर किसान खड़गजीत सिंह के दो शौक थे- पहला कुश्ती लड़ना और दूसरा घुड़सवारी.

इटौली में खड़गजीत सिंह के परिवार की जिंदगी आराम से गुजर रही थी. उसी बीच, खड़गजीत सिंह का घोड़ा एक अंग्रेज अफसर को पसंद आ गया. एक दिन उसने खड़गजीत सिंह से जबरन घोड़ा छिनवा लिया. उन्होंने अंग्रेज अफसर को घोड़ा लौटाने के लिए कहा, लेकिन अफसर ने उनकी बातों पर गौर नहीं किया, उलटे उनके साथ बदसलूकी की और गालियां देने लगा.

गालियां सुनते ही खड़गजीत सिंह का पारा चढ़ गया और उन्होंने अंग्रेज अफसर को उठाकर जमीन पर पटक दिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी. जब तक सिपाही अपने अफसर की मदद के लिए आते, तब तक खड़गजीत सिंह अपने घोड़े पर सवार होकर भाग निकले. बौखलाए अंग्रेज अफसर ने सिपाहियों की फौज इकट्ठा की और खड़गजीत सिंह के घर धावा बोल दिया. घर की तलाशी ली गई. खड़गजीत सिंह घर पर नहीं मिले. गुस्साए अंग्रेज अफसर और सिपाहियों ने उनके परिजनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. खड़गजीत सिंह के पिता को गिरफ्तार कर लिया. घोड़े को गोली मार दी गई.

अंग्रेज अफसर ने घर, खेत और जानवरों को कुर्क करवा दिया. ऐसे में इटौली गांव का एक खुशहाल परिवार अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष के जुर्म में सड़क पर आ गया. इसके बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी. करीब दो साल तक अंग्रेजों से छिपते-छिपाते बचते-बचाते पूरा परिवार सैफई गांव पहुंचा. खड़गजीत सिंह के पिता के दोस्त के घर में इस परिवार को शरण मिली.

पिता के दोस्त ने अपनी एकलौती बेटी की शादी खड़गजीत सिंह के साथ कर दी. इस तरह दोनों परिवारों की दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई. खड़गजीत की पत्नी ने चार बेटों और एक बेटी को जन्म दिया. उन्होंने अपने बेटों के नाम छेदा लाल, बच्ची लाल, सुघर सिंह और बादशाह सिंह रखे. बता दें कि 22 नवंबर, 1939 को जन्मे मुलायम सिंह यादव खड़गजीत सिंह के तीसरे नंबर के बेटे सुघर सिंह के बेटे हैं.

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