BJP के नए अध्यक्ष के सामने है पहली परीक्षा, UP निकाय चुनाव में 'कमल खिलाने' की जिम्मेदारी

BJP के नए अध्यक्ष के सामने है पहली परीक्षा, UP निकाय चुनाव में 'कमल खिलाने' की जिम्मेदारी
फोटो: शिल्पी सेन, यूपी तक

UP Political News: उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की नियुक्ति के बाद पार्टी की प्रदेश यूनिट सक्रिय हो गई है. 'मिशन 2024' के लिए रणनीति तैयार करने का काम तो शीर्ष स्तर पर होगा, लेकिन कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना अभी से जरूरी है. इसके लिए पार्टी जहां कार्यक्रमों और अभियानों की रूपरेखा तय कर रही है, वहीं प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सैनी की नजर अपने पहले ‘टास्क’ पर है. मिशन लोकसभा के ‘फाइनल’ से पहले इस टेस्ट को लेकर पार्टी जल्द ही बड़ी बड़ी तैयारी के साथ जमीन पर उतरने वाली है.

अहम बिंदु

बता दें कि यूपी में निकाय चुनाव नवंबर के अंतिम सप्ताह में या दिसंबर के पहले सप्ताह में होंगे. ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि 2024 के ‘फाइनल’ से पहले सियासी जमीन पर हर राजनीतिक दल का यही ‘टेस्ट’ होगा. पार्टी ने जहां इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है वहीं प्रदेश नेतृत्व की नजर अब सबसे पहले इसी लक्ष्य पर है. नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सैनी की पहली परीक्षा यही होगी.

इस लक्ष्य का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है, कि धर्मपाल सिंह ने अपनी नियुक्ति के बाद लखनऊ पहुंचने से पहले पश्चिमी यूपी में इसी लक्ष्य के लिए जमीन तैयार करने पर बैठक की. इसमें यूपी में पार्टी के सभी जिलाध्यक्ष जुड़े. इस बैठक में जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए गए कि नगर निकाय चुनाव के लिए अभी से जमीन तैयार करें.

दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ऐसे समय पर नियुक्त हुए हैं, जब सामने 2024 के रूप में बड़ा लक्ष्य है. 'मिशन मोदी' के रथ को आगे ले जाने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश में इन्हीं दोनों पर होगी. भूपेंद्र चौधरी योगी सरकार में मंत्री रहे हैं. पश्चिमी यूपी की सियासी जमीन पर पकड़ और ‘जाट’ फैक्टर उनकी नियुक्ति की वजह भी रही. ऐसे में 2024 में इस क्षेत्र में कमल खिलाना उनकी जिम्मेदारी होगी.

ये बात इसलिए भी अहम है, क्योंकि वेस्ट यूपी में समाजवादी पार्टी और आरएलडी के गठबंधन के कारण पार्टी की 2022 के विधानसभा चुनाव में भी चुनौती मिली. पार्टी का फोकस इस क्षेत्र में होगा क्योंकि चुनाव की शुरुआत इसी वेस्ट यूपी से ही होती है. इसलिए पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले सेमी फाइनल में यहां कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती. खुद भूपेंद्र चौधरी भी पंचायत चुनाव में ब्रज क्षेत्र के प्रभारी रह चुके हैं. ऐसे में इस क्षेत्र के सियासी जमीन को समझने का उनका अनुभव भी काम आने वाला है. जल्द ही दोनों यूपी का दौरा भी करने वाले हैं.

प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री का पहला ‘टास्क’ इस लिहाज से भी अहम है, क्योंकि प्रदेश के 17 नगर निगमों और नगर पालिका परिषद में नतीजों से सीधा संदेश जाएगा. विधानसभा चुनाव में मिली जीत को बरकरार रखने से ये संदेश जाएगा कि पार्टी की जमीनी क्षेत्रों में कितनी पकड़ है. पार्टी इसके लिए सबसे पहला जरिया पीएम मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से गांधी-शास्त्री जयंती 2 अक्टूबर तक मनाए जाने वाले ‘सेवा पखवाड़े’ को बनाएगी.

इसमें कार्यक्रमों की एक शृंखला तैयार की गई है. पार्टी इसके जरिए लगभग हर घर का दरवाजा खटखटाएगी. हर वर्ग के लोगों तक पहुंचेगी. इस सेवा पखवाड़े को नगर निकाय चुनाव की तैयारी की दृष्टि से ही देखा जा रहा है.

अहम बिंदु

पार्टी का पुराना सूत्र ‘संवाद और सम्पर्क’ नगर निकाय चुनाव के लिए भी काम करेगा. यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष और एमएलसी विजय बहादुर पाठक पहले हैं कि ‘बीजेपी हर चुनाव को गम्भीरता से लेती है. चाहे वो लोकसभा चुनाव हों, चाहे विधानसभा चुनाव हों या नगर निकाय, पंचायत चुनाव, शिक्षक चुनाव. पिछले नगर निकाय चुनाव में भी पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की थी. पार्टी इस नगर निकाय चुनाव में भी बड़ी जीत दर्ज करेगी.'

पिछले चुनाव में पार्टी ने यूपी के 16 नगर निगमों में से 14 पर जीत हासिल की थी. 2 नगर निगम अलीगढ़ और मेरठ में बीएसपी ने जीत हासिल की थी. इस बार शाहजहांपुर नगर निगम बनने से नगर निगमों की संख्या 17 हो गई है. पार्टी ने सभी नगर निगम जीत कर सौ प्रतिशत सफलता हासिल करने का बड़ा लक्ष्य तय क्या है.

अपने पहले 'टास्क' के लिए बीजेपी की सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष के किसी भी तरह के गठजोड़ को रोकना है. शिवपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से राहें अलग कर इसके लिए बीजेपी की राह कुछ आसान करने का संकेत दिया है, तो वहीं बीजेपी की कोशिश समाजवादी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को तोड़ने की भी है.

इसके साथ ही अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए भी पार्टी उनको लगातार सक्रिय रखेगी. पहले ‘टास्क’ में नगर निगम और नगर पालिका परिषदों में टिकट बांटने में कार्यकर्ताओं को प्रमुखता देने की बता भी तय हो चुकी है, जिससे इस चुनाव से आगे मिशन 2024 के लक्ष्य के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार किया जा सके. ज़िला स्तर पर इसके लिए अलग अलग नेताओं और जिलों के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी होगी जो अपने क्षेत्रों में सक्रिय नजर आएंगे. सरकार और संगठन के तालमेल की दृष्टि से जल्दी ही नगर निकाय चुनाव के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री भी लगाए जाएंगे. इसके साथ ही प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी.

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