UP चुनाव: बदायूं विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी की होगी परीक्षा?

UP चुनाव: बदायूं विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी की होगी परीक्षा?
बदायूं जिले की एक तस्वीरफोटो: एम. झाजो/ इंडिया टुडे

बदायूं उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख ऐतिहासिक जिला है। यह जिला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के केंद्र में गंगा नदी के पास स्थित है। मुस्लिम इतिहासकार श्री रोज खां लोदी के अनुसार, 256 ई0 में सम्राट अशोक ने यहां बौद्ध विहार और किला बनवाकर इसकी बुद्धमऊ का नाम दिया था।

रोहिलखंड का दिल बोले जाने वाला बदायूं सूफी-संतों की भूमि भी रहा है। यह शहर भारत की राजधानी नई दिल्ली से 235 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 311 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां पर 2 लोकसभा क्षेत्र और 4 विधानसभा क्षेत्र हैं।

गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनावों में इस जिले की 6 में से 5 विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि 2012 के चुनावों में बीजेपी को यहां पर एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी।

बदायूं जिले की विधानसभा सीटों का विस्तार से विवरण:

बदायूं

2017: इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार महेश चंद्र गुप्ता ने बदायूं की सीट पर जीत हासिल की थी। महेश चंद्र गुप्ता ने सपा के उम्मीदवार आबिद रजा खान को 16,467 मतों के अंतर से हराया था।

2012: साल 2012 के विधानसभा चुनावों में यह सीट सपा के उम्मीदवार आबिद रजा खान ने जीती थी। आबिद रजा ने बीजेपी के उम्मीदवार महेश चंद्र गुप्ता को 15,413 वोटों से हराया था।

बिसौली

2017: बिसौली की सीट को बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ रहे कुशाग्र सागर ने जीता था। उन्होंने सपा के उम्मीदवार आशुतोष मौर्या उर्फ राजू को 10,688 मतों के अंतर से हराया था।

2012: इस साल यह सीट सपा के खाते में गई थी। सपा के आशुतोष मौर्या उर्फ राजू ने 42,990 मतों के अंतर से बीएसपी की उम्मीदवार प्रीति सागर उर्फ पुष्पा रानी को हराया था।

सहसवान

2017: इस चुनाव में सपा के उम्मीदवार ओमकार सिंह ने बीएसपी के उम्मीदवार अरशद अली को हराया था। इस मुकाबले में दोंनो के बीच 4,269 वोटों का अंतर था।

2012: इस साल हुए विधानसभा चुनाव में भी सपा के ओमकार सिंह को ही जीत मिली थी। ओमकार सिंह ने बीएसपी के मीर हैदर अली उर्फ बाबर मियां को 7,027 वोटों से हराया था।

बिल्सी

2017: 2012 के विधानसभा चुनावों में इस सीट से जीत हासिल करने वाले बीएसपी के मुसर्रत अली बिट्टन बीजेपी के उम्मीदवार पंडित राधा कृष्ण शर्मा से 26,979 मतों के अंतर हार गए थे।

2012: इस चुनाव में यह सीट बीएसपी के खाते में गई थी। बीएसपी के मुसर्रत अली बिट्टन ने सपा के विमल कृष्ण अग्रवाल को 8,328 वोटों से हराया था।

शेखपुर

2017: इस चुनाव में बीजेपी के धर्मेंद्र कुमार शाक्या ने सपा के उम्मीदवार आशीष यादव को हराया था। दोनों उम्मीदवार को मिले वोटों का अंतर 23,386 था।

2012: 2017 का विधानसभा चुनाव हारे सपा के उम्मीदवार आशीष यादव ने साल 2012 के चुनावों में इस सीट से जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के भगवान सिंह शाक्य को 8,252 वोटों से हराया था।

दातागंज

2017: इस चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार राजीव कुमार सिंह उर्फ बब्बू भइया ने बीएसपी के सिनोद कुमार शाक्य को 25,759 वोटों से हराया था।

2012: इस चुनाव में यह सीट बीएसपी के सिनोद कुमार शाक्य ने जीती थी। उन्होंने सपा के प्रेमपाल सिंह यादव को 5,327 वोटों के अंतर से हराया था।

बीजेपी और सपा के लिए क्यों अहम है बदायूं विधानसभा क्षेत्र?

2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में बदायूं की जनता ने एकतरफा बीजेपी का साथ दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से जिसपर सबसे बड़ा उलटफेर हुआ था उनमें से एक सीट बदायूं की भी थी। दरअसल, इस सीट पर पिछले काफी समय से चुनाव जीतते आ रहे सपा संगरक्ष मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव चुनाव हार गए थे।

धर्मेंद्र यादव को हराया था बीजेपी की डॉ. संघमित्रा मौर्या ने। संघमित्रा मौर्या यूपी सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या की बेटी हैं। इस लिहाज से आगामी 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए बदायूं विधानसभा क्षेत्र काफी अहम है। क्योंकि पिछले 2 बड़े चुनावों में यहां की जनता ने बीजेपी के पक्ष में ही वोट डाला है। वहीं, सपा के लिए यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2017 से पहले इस क्षेत्र में सपा का ही दबदबा था।

आगमी चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा इस विधानसभा क्षेत्र में 2012 के विधानसभा चुनाव वाला अपना प्रदर्शन दोहराने में कामयाब होगी या बीजेपी फिर एक चमत्कार करेगी।

संबंधित खबरें

No stories found.
UPTak - UP News in Hindi (यूपी हिन्दी न्यूज़)
www.uptak.in