COVID अस्पताल से गायब हुए मरीज के मामले में इलाहाबाद HC सख्त, फटकार लगाकर दिया ये आदेश

COVID अस्पताल से गायब हुए मरीज के मामले में इलाहाबाद HC सख्त, फटकार लगाकर दिया ये आदेश
फोटो: पंकज श्रीवास्तव

प्रयागराज में स्थित तेज बहादुर सप्रू बेली कोविड लेवल-टू अस्पताल से 11 माह से लापता 82 वर्षीय कोविड मरीज राम लाल यादव की बरामदगी की मांग को लेकर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने लापता राम लाल यादव को अदालत में पेश न करने पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा है कि 6 मई तक बेली अस्पताल के कोविड वॉर्ड से लापता राम लाल यादव को अदालत में पेश करें या सभी विपक्षी अधिकारी अदालत में हाजिर हों. कोर्ट ने कहा है कि अस्पताल ने मरीज को अवैध तरीके से निरुद्ध किया है और अभी तक जांच में मौत की पुष्टि नहीं हुई है. लापता मरीज कहां पर है इसकी जांच जारी है.

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सोमवार को एफीडेविट दाखिल कर अदालत को जानकारी दी गई कि बेली अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की हार्ड डिस्क 20 अप्रैल 2022 को फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेजी गई है. कोर्ट ने इस मामले में अदालत में पेश हुए अधिकारियों के रवैए पर गहरी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने पूछा है कि आखिर सीसीटीवी खराब था तो हार्ड डिस्क कैसे फॉरेंसिक लैब भेजी गई. कोर्ट ने विपक्षी अधिकारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि 6 मई को दोपहर 2 बजे तक लापता राम लाल यादव को हर हाल में पेश करें नहीं तो सभी विपक्षी अधिकारी अदालत में हाजिर हों.
अहम बिंदु

कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि लापता राम लाल यादव को पेश न करने पर विपक्षी अधिकारियों पर अदालत 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाएगी. मामले की अगली सुनवाई 6 मई को हाई कोर्ट में होगी.

गौरतलब है कि कोविड पॉजिटिव होने के बाद 82 वर्षीय राम लाल यादव को 4 मई 2021 को तेज बहादुर सप्रू बेली अस्पताल के कोविड वॉर्ड में तीन नंबर बेड में भर्ती कराया गया था. जहां से 8 मई 2021 को रहस्यमय ढंग से रामलाल लापता हो गए. इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने 9 मई को कैंट थाने की बेली चौकी में गुमशुदगी की जानकारी दी. मगर उसके बाद से अस्पताल ने कोई जानकारी नहीं दी.

अस्पताल के कोरोना वॉर्ड से राम लाल यादव के लापता होने के मामले में उनके बेटे राहुल यादव ने 25 मई 2021 को हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर उनकी बरामदगी की मांग की. जस्टिस एसपी केसरवानी और जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई.

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