लखनऊ: सामूहिक आत्महत्या से पहले परिवार ने काटा आखिरी केक, फिर मौत को यूं गले लगा लिया

लखनऊ: सामूहिक आत्महत्या से पहले परिवार ने काटा आखिरी केक, फिर मौत को यूं गले लगा लिया
तस्वीर: आशीष श्रीवास्तव, यूपी तक

लखनऊ के जानकीपुरम थाना के एक परिवार के 3 सदस्यों ने बुधवार को कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान दे दी. पुलिस की जांच में सामने आया है कि पूरे परिवार ने इस जीवन के अंत और नए जन्म के लिए बाकायदा केक काटा. केक में सल्फास की गोली मिलाकर सबने खाया और तड़पने लगे. कुछ देर बाद सभी मौत की नींद सो गए. ध्यान देने वाली बात है कि नलकूप विभाग में जेई के पद पर तैनात शैलेंद्र कुमार,पत्नी गीता और बेटी प्राची को गंभीर हालत में पड़ोसी अस्पताल ले गए जहां उनकी मौत हो गई.

पड़ोसी लव कुश के मुताबिक- जहर खाने के बाद जैसे ही हम लोगों को पता लगा हम दरवाजा फांदकर अंदर गए तो देखा कि सभी घर की गैलरी में जमीन पर पड़े तड़प रहे थे. जब हम उनको उठा कर अस्पताल ले जाने लगे तो तड़पते हुए मना करने लगे नहीं जाना अस्पताल. छोड़ दो. छोड़ दो. जिसको सुनकर हम सभी लोग चौंक गए. आखिर क्यों अस्पताल नहीं जाना चाहते हैं. हालांकि हम अस्पताल लेकर फिर भी पहुंचे, लेकिन वहां पर उनकी दर्दनाक मौत हो गई.

मौत से पहले ऑफिस में किया फोन

मृतक शैलेंद्र ने सुसाइड से पहले ऑफिस के एक व्यक्ति को फोन किया था और कहा था कि अब जी नहीं पाएंगे. केक मंगाकर जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. हालंकि यह बात ऑफिस सहकर्मी को समझ नहीं आई. जिसके बाद उसने 112 पर फोन करके पुलिस को भेजा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

पड़ोसन इतनी घबरा गई कि गाड़ी नहीं चला पाई

जहर खाने के बाद तीनों तड़पत रहे थे. जब अस्पताल जाने के लिए गाड़ी नहीं मिली तो पड़ोस में रहने वाली सीमा ने अपनी गाड़ी में उनको डाला, लेकिन गाड़ी में भी वह तड़पते रहे और चिल्लाते रहे कि अस्पताल नहीं जाना. जिसके बाद गाड़ी चला रही सीमा ने घबराकर गाड़ी छोड़ दी. हालांकि उसके बाद पुलिस के कॉन्स्टेबल ने गाड़ी चला कर अस्पताल तक पहुंचाया.पर वहां पर तीनों की मौत हो गई. इस दर्दनाक हादसे ने सभी मोहल्लेवासियों को सकते में डाल दिया है.

अहम बिंदु

आत्महत्या की ये वजह आई सामने

पुलिस के मुताबिक, ज्यादा पैसों और प्रॉपर्टी के लालच के चलते परिवार के 3 लोगों को मजबूरी में जहर खा कर मौत को गले लगाना पड़ा. मृतक शैलेंद्र कुमार ने प्रॉपर्टी डीलर के साथ मिलकर 3 करोड़ रुपये की जमीन एग्रीमेंट कराया था, जिसके लिए उसने तकरीबन 65 लाख रुपये अपने नजदीकी रिश्तेदार से लिए थे और उसको बताया था कि वह उसकी नौकरी नलकूप विभाग में लगवा देगा. मृतक ने जिस जमीन के लिए पैसे दिए थे, वह जमीन विवादित निकल गई, जिसका केस कोर्ट में चल रहा था.

इस दौरान नौकरी के नाम पर लिए गए पैसे भी डूब गए. यही नहीं, मृतक ने कई लोगों से 10-10 लाख रुपये लेकर जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी और जब लोगों को जमीन नहीं मिली, तो वे पैसा वापस करने की मांग करने लगे. एडीसीपी नॉर्थ जोन अनिल कुमार यादव के मुताबिक, मृतक के ऊपर बहुत सारा कर्ज हो गया था. जमीन में पैसे लगाने के लिए 65 लाख दिए थे, वह भी डूब गए. इस वजह से जेई और उसके साथ उसकी पत्नी और बेटी को सुसाइड करना पड़ा.

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