UP: मदरसे में गैर मुस्लिम नहीं पढ़ेंगे? बाल आयोग और मदरसा परिषद आया आमने-सामने

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सांकेतिक तस्वीर फोटो - यूपी तक

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के उस सिफारिश को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें मदरसों में पढ़ने वाले गैर मुस्लिम बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूल में करवाने को कहा गया था. यह फैसला परिषद चेयरमैन डॉक्टर इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. आयोग ने पिछले दिनों सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर गैर मुस्लिम बच्चों को मदरसे से निकाल कर दूसरे स्कूलों में भेजने की सिफारिश की थी.

अहम बिंदु

इस फैसले को लेकर अब यूपी में बाल आयोग और मदरसा शिक्षा परिषद आमने सामने आ गए हैं. बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य डॉक्टर सुचित्रा चतुर्वेदी ने कहा कि गैर मुस्लिम बच्चों को वहां से हटाना है या नहीं यह जिम्मेदारी परिषद की नहीं बाल आयोग की है.

डॉक्टर सुचित्रा चतुर्वेदी ने कहा कि बाल आयोग एक संवैधानिक आयोग है और सरकार ने बच्चों की सुरक्षा का काम आयोग को दिया है. मदरसे में गैर मुस्लिम बच्चे केवल मुस्लिम शिक्षा लेने के लिए ही वहां जाए और वह शिक्षा के अधिकार से वंचित रहे. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बोर्ड परिषद के कल के बयान का खंडन करता है. आयोग सभी गैर मुस्लिम बच्चों को वहां से हटाकर आरटीई के तहत उनके एडमिशन करवाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आयोग में बहुत निरीक्षण किया मदरसों का उसके बाद एक पत्र जारी किया कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद किया जाए. उनका सर्वे किया जाए .

डॉक्टर सुचित्रा चतुर्वेदी ने कहा कि मदरसा परिषद के अध्यक्ष इफ्तिखार जी को समझना पड़ेगा कि यह जिद्द गलत है, यह बात हिंदू मुस्लिम की नहीं है. कोई गैर धर्म का अभिभावक नहीं चाहेगा उनका बच्चा मदरसे में पढ़े. मदरसे का बच्चा किसी भी यूनिवर्सिटी में एडमिशन नहीं ले पाता. इसकी चिंता आयोग को ही करनी होगी, मदरसे में कट्टर इस्लामी शिक्षा दी जाती है.

वहीं यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में मदरसों में बेहतर शिक्षा के लिए सरकार काम कर रही है. देश के प्रधानमंत्री मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर देना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश के मदरसों में गैर मुस्लिम बच्चों का ये सर्वे ठीक नहीं है. इससे बच्चों में धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे संस्कृत विद्यालयों में भी तो कई गैर-हिंदू शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. मिशनरी स्कूलों में भी हर धर्म के बच्चे पढ़ रहे हैं.'

बता दें कि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की तरफ से 8 दिसंबर 2022 को एक पत्र लिखा गया था. इस पत्र के अनुसार मदरसा ऐसा शिक्षण संस्थान है जहां धार्मिक शिक्षा दी जाती है. आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के अनुसार आयोग को शिकायतें मिली हैं कि गैर मुस्लिम छात्र भी सरकारी अनुदान वाले और मान्यता प्राप्त मदरसों में जा रहे हैं.

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