उसरी चट्टी कांड मामले में बृजेश-त्रिभुवन सिंह को राहत, विशेष अदालत में केस ट्रायल पर रोक

 बाहुबली नेता बृजेश सिंह.
बाहुबली नेता बृजेश सिंह.तस्वीर: संतोष शर्मा, यूपी तक.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 21 वर्ष पुराने उसरी चट्टी कांड मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत में बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह को बड़ी राहत मिली है. बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के खिलाफ चल रहे आपराधिक केस की सुनवाई पर कोर्ट ने रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता की तरफ से कोर्ट में सैकडों की भीड़ के कारण निष्पक्ष विचारण की उम्मीद नहीं है. वहीं कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को नोटिस जारी की है.

कोर्ट ने जिला जज से भी रिपोर्ट मांगी है और केस पूर्वांचल के बाहर स्थानांतरित करने की याचिका पर राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है. यह आदेश न्यायमूर्ति डी के सिंह ने पूर्व विधायक त्रिभुवन सिंह की अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है. इस जानलेवा हमले व षड्यंत्र के मामले में बाहुबली बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह आरोपित हैं.

15 जुलाई 2001 को मुख्तार अंसारी अपने क्षेत्र मऊ जा रहे थे. इस दौरान उसरी चट्टी पर स्वचालित हथियारों से काफिले पर  हमला किया गया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी.  एक हमलावर भी मारा गया था. इस मामले में मुख्तार अंसारी ने बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के खिलाफ मोहम्मदाबाद थाने में नामजद  रिपोर्ट दर्ज कराई है. जिसका ट्रायल गाजीपुर की विशेष अदालत में चल रहा है.

कोर्ट ने विपक्षी मुख्तार अंसारी को नोटिस जारी की है. याची का कहना है कि मऊ, गाजीपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में शिकायत कर्ता की दहशत है. ट्रायल के समय उसके गैंग के सैकड़ों लोग अदालत में आते हैं. इस दौरान याची के परिवार के पांच सदस्यों की हत्या हो चुकी है. वह बांदा जेल में बंद हैं. उसका भाई गाजीपुर का सांसद हैं. बेटा मऊ से विधायक हैं. भतीजा गाजीपुर से विधायक हैं. कोर्ट में ही भीड़ इकट्ठी कर याची को मारने की आशंका है. याची के जीवन को गंभीर खतरा है. मऊ जिला जज की रिपोर्ट है कि भारी भीड़ के चलते निष्पक्ष ट्रायल की संभावना नहीं है. विशेष अदालत में आपराधिक केस का ट्रायल रोका जाए. याचिका की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी.

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