UP Bus Fare Controversy: उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की वापसी यात्रा के दौरान रोडवेज बस किराए को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उनसे एक तरफ सफर में पूरा किराया वसूला गया, जबकि दूसरी तरफ लौटते समय केवल 50% किराए की बात कही गई. इस असमंजस की स्थिति ने यात्रियों के बीच भ्रम और नाराजगी दोनों पैदा कर दी है. वहीं परिवहन निगम का कहना है कि सरकार के निर्देशों के अनुसार 50% किराया छूट लागू कर दी गई है और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी.
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किराए को लेकर दो अलग-अलग अनुभव
अभ्यर्थियों के अनुसार, यात्रा के अलग-अलग चरणों में किराए को लेकर अलग-अलग अनुभव सामने आए. कुछ लोगों का कहना है कि जब वे अपने गृह जिले से परीक्षा केंद्र की ओर आए थे, तब उनसे पूरा किराया वसूला गया. वहीं वापसी यात्रा में उन्हें 50% छूट का लाभ मिला.
आकाश कुमार नाम के एक अभ्यर्थी ने बताया कि एक तरफ यात्रा में पूरा किराया लिया गया, जबकि दूसरी तरफ आधा किराया बताया गया. वहीं बॉबी कुमार ने कहा कि उनके होम डिस्ट्रिक्ट से आने पर उनसे पूरी टिकट ली गई थी, क्योंकि उस समय कंडक्टर के पास कोई स्पष्ट आदेश उपलब्ध नहीं था.
आदेश को लेकर भ्रम की स्थिति
कई अभ्यर्थियों ने यह भी बताया कि उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के उस निर्देश का हवाला दिया जिसमें 50% किराया छूट की बात कही गई थी लेकिन उन्हें बताया गया कि उस समय तक आधिकारिक आदेश उपलब्ध नहीं था. इसी कारण कुछ जगहों पर पूरा किराया वसूला गया.
कुछ यात्रियों को मिली छूट, कुछ को नहीं
वहीं कुछ अभ्यर्थियों का अनुभव अलग रहा. कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें वापसी यात्रा में 50% किराया ही देना पड़ा और किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. प्रिया यादव नाम की एक अभ्यर्थी ने बताया कि उनसे दोनों तरफ केवल आधा किराया ही लिया गया और कोई अतिरिक्त समस्या नहीं आई.
परिवहन निगम का बयान
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के जनसंपर्क अधिकारी अमर सहाय ने बताया कि सरकार के निर्देशों के बाद सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को 50% किराया छूट लागू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि यदि कहीं पूरा किराया लेने की शिकायत सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
ग्राउंड पर स्थिति और सवाल
ग्राउंड रिपोर्ट में यह सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों से फुल किराया लिया गया, जबकि बाद में वही सुविधा 50% छूट के साथ दी गई. इस असमानता ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर आदेशों का पालन हर जगह समान रूप से क्यों नहीं हो पा रहा है.
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