लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर घटिया गुणवत्ता के काम और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.
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उन्होंने कहा कि आधे-अधूरे और निम्न स्तर के एक्सप्रेसवे बन जाने तथा भ्रष्टाचार का टारगेट पूरा हो जाने के बाद ही मंत्री को यूपीडा की जिम्मेदारी से हटाया गया.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, "अभी हाफ हुए हैं, विधानसभा में टिकट नहीं मिलेगा तो साफ हो जाएंगे. जब सारे ‘घटिया एक्सप्रेसवे’ बन गए और भ्रष्टाचार का आपसी लेनदेन का टारगेट पूरा हो गया तब हटाया तो क्या हटाया?"
यूपी में क्या बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ?
8 जून 2026 को हुई एक बड़ी प्रशासनिक बदलाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग की कमान संभाल ली. उद्योग मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) की जिम्मेदारी से अलग कर दिया गया. अब यूपीडा सीधे मुख्यमंत्री के इंफ्रास्ट्रक्चर विभाग के अधीन आ गया है.
सरकार का कहना है कि बदलाव काम को बेहतर तरीके से करने और विभागों के बीच दोहराव खत्म करने के लिए किया गया है. इससे पहले यूपीडा औद्योगिक विभाग के तहत था और फाइलें मंत्री के पास जाती थीं. अब ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय से गुजरेंगे.
अखिलेश का बड़ा दावा
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले करीब 225 सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के सामने भाजपा की हार, बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक और जमीन से जुड़ी समस्याओं पर जनता का गुस्सा इसके पीछे है.
उन्होंने कहा कि कई भाजपा विधायक खुद चुनाव लड़ना नहीं चाहते क्योंकि उनके पास जीत की उम्मीद नहीं बची है. अखिलेश ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा के मूल वोटर भी कम हो गए हैं.
एक्सप्रेसवे का मुद्दा क्या है?
उत्तर प्रदेश में पिछले सालों में कई एक्सप्रेसवे बने हैं, जैसे पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे. योगी सरकार इन्हें राज्य के विकास का बड़ा इंजन बताती है. वहीं विपक्ष अक्सर इन प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है.
अखिलेश यादव अपनी सरकार के समय शुरू हुए प्रोजेक्ट्स का श्रेय लेते रहे हैं, जबकि भाजपा इन्हें पूरा करने और नए प्रोजेक्ट्स लाने का दावा करती है. ये मुद्दा अब चुनावी रणनीति और टिकट वितरण से भी जुड़ गया है. दोनों पार्टियां 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां तेज कर रही हैं.
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